पढ़ाई के साथ क्रांतिकारी संगठन को मजबूत किया 1925 और 1926 का समय भगत सिंह के अध्ययन और राजनीतिक सोच के विकास का महत्वपूर्ण दौर था। नेशनल कॉलेज में उन्होंने इतिहास, राजनीति और अर्थशास्त्र का अध्ययन किया। सुखदेव और भगवती चरण के साथ उन्होंने रूसी क्रांतिकारियों के अध्ययन के लिए एक स्टडी सर्किल बनाया। किताबें पढ़ने और राजनीतिक विचारों पर चर्चा के साथ वे उत्तर प्रदेश और बंगाल के क्रांतिकारियों से संपर्क भी बनाए रखते थे। काकोरी मामले की सुनवाई के दौरान वे लखनऊ गए और जेल में बंद क्रांतिकारियों से गुप्त संपर्क स्थापित किया। उन्हें जेल से छुड़ाने की योजना पर भी काम किया गया। इस दौरान भगत सिंह दो बार गिरफ्तारी से बच निकले। योजना सफल नहीं हुई और वे फिर कानपुर चले गए। 1926 की शुरुआत में उन्होंने बिजॉय कुमार सिन्हा और सुखदेव के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश और पंजाब में बचे हुए क्रांतिकारी संगठन को फिर से संगठित करने की कोशिश की। गिरफ्तारी और नौजवान भारत सभा 1926 में लाहौर में दशहरे के मौके पर बम विस्फोट हुआ। पुलिस ने भगत सिंह को इस मामले में गिरफ्तार किया। उन्हें बोरस्टल जेल में रखा गया और कुछ समय तक एकांत कोठरी में भी रखा गया। उन पर दशहरे के दिन हुए विस्फोट में शामिल होने का आरोप लगाया गया। लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया चलने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इस दौरान वे सीधे क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले सकते थे। इसलिए उन्होंने सार्वजनिक गतिविधियों पर ध्यान दिया। इसी दौर में नौजवान भारत सभा का संगठन मजबूत हुआ। काकोरी कांड के शहीदों की याद में काकोरी दिवस मनाया गया। भगत सिंह ने 1915 और 1916 के लाहौर षड्यंत्र मामलों के क्रांतिकारियों पर सार्वजनिक व्याख्यान आयोजित कर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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