सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को अपने पैतृक घर पहुंचे। उन्होंने घर के बाहर पूजा-अर्चना की और इसके बाद खुद गैंती चलाकर मकान का हिस्सा तोड़ा। अपने जन्मस्थान और बचपन की यादों से जुड़े घर को विकास कार्य के लिए समर्पित करते समय मुख्यमंत्री भावुक नजर आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस घर में जन्म लिया, छोटे से बड़े हुए और खेले-कूदे, उसे तोड़ना पड़े तो मन पर असर होना स्वाभाविक है। लेकिन अगर सिंहस्थ के लिए यह जरूरी है तो विकास के लिए यह बलिदान देना चाहिए। हम सब मिलकर यह काम कर रहे हैं। पूरा देश देख रहा है कि लोग दूसरों की सुविधा के लिए अपने मकान पीछे हटा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब वे पहली बार साइंस कॉलेज से चुनाव जीतकर आए और जॉइंट सेक्रेटरी तथा फिर प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ा, तब से उनके सामने हमेशा यह बात रही कि आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए अपने आचरण और कार्यों से उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दृष्टि से उत्कृष्ट उदाहरण हैं। वे व्यक्तिगत हितों से परे रहकर नियम, कानून और सुशासन के लिए आवश्यक विषयों को प्राथमिकता देते हैं। उनके सार्वजनिक जीवन से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के लोगों ने अपने मकान खुद पीछे हटाए हैं। उज्जैन की आबादी करीब 8 लाख है, लेकिन सिंहस्थ के दौरान करीब 40 करोड़ लोगों के आने का बोझ रहता है। सभी ने इसमें योगदान दिया है। उन्होंने अपनी सरकार को भी धन्यवाद देते हुए कहा कि बिना भेदभाव के हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई और पारसी समुदाय के लोगों ने अपने देवस्थान तक पीछे किए हैं। इससे सरकार के प्रति विश्वास बनता है। यही उज् …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
सीएम मोहन यादव ने अपने ही घर पर क्यों चलाई गैंती?: भावुक होकर बोले- जिस घर में बचपन बीता उसे तोड़ना आसान नहीं
सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को अपने पैतृक घर पहुंचे। उन्होंने घर के बाहर पूजा-अर्चना की और इसके बाद खुद गैंती चलाकर मकान का हिस्सा तोड़ा। अपने जन्मस्थान और बचपन की यादों से जुड़े घर को विकास कार्य के लिए समर्पित करते समय मुख्यमंत्री भावुक नजर आए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जिस घर में जन्म लिया, छोटे से बड़े हुए और खेले-कूदे, उसे तोड़ना पड़े तो मन पर असर होना स्वाभाविक है। लेकिन अगर सिंहस्थ के लिए यह जरूरी है तो विकास के लिए यह बलिदान देना चाहिए। हम सब मि