नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को रक्षा उत्पादन में इतना सक्षम होना चाहिए कि जरूरी क्षमताओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े। उन्होंने आत्मनिर्भरता का मतलब बताते हुए कहा कि भारत में डिजाइन, विकास, निर्माण, रखरखाव और अपग्रेड की पूरी क्षमता विकसित होनी चाहिए। साथ ही देश को दुनिया के लिए रक्षा उपकरण बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। आधुनिक युद्ध में सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों की भूमिका का जिक्र करते हुए जनरल सेठ ने कहा कि दुनियाभर के संघर्षों से जुड़ी सूचनाएं लगातार सोशल मीडिया पर सामने आती हैं। उनके मुताबिक, इन सूचनाओं और अलग-अलग नैरेटिव के बीच वास्तविक युद्ध की तस्वीर धुंधली हो सकती है और भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।सेना प्रमुख ने कहा कि तकनीक और आधुनिक क्षमताओं के बावजूद एक चीज नहीं बदली है। उनके अनुसार, युद्ध में सफलता का ठोस और उपयोगी पैमाना जमीन ही है। उन्होंने कहा कि जीत को क्षेत्रीय नियंत्रण के आधार पर मापा जाता है और जमीन पर कब्जा, सुरक्षा और रक्षा सैनिक ही करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य तकनीक विकसित करते समय सबसे अहम सवाल यह होना चाहिए कि नई क्षमता जमीन पर मौजूद सैनिक की कितनी मदद करती है। उनके मुताबिक, सैनिक को क्षमता विकास के केंद्र में रखा जाना चाहिए।जनरल धीरज सेठ ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज के संघर्षों में लंबे समय तक चलने वाले युद्ध और बीच-बीच में तेज लड़ाई के दौर देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक लड़ाई की अवधि कम कर सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
सेना प्रमुख: 'जमीनी स्थिति ही सैन्य अभियान की सफलता का पैमाना'; सोशल मीडिया दुष्प्रचार पर क्या बोले धीरज सेठ?
नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश को रक्षा उत्पादन में इतना सक्षम होना चाहिए कि जरूरी क्षमताओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर न रहना पड़े। उन्होंने आत्मनिर्भरता का मतलब बताते हुए कहा कि भारत में डिजाइन, विकास, निर्माण, रखरखाव और अपग्रेड की पूरी क्षमता विकसित होनी चाहिए। साथ ही देश को दुनिया के लिए रक्षा उपकरण बनाने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। आधुनिक युद्ध में सोशल मीडिया और डिजिटल