संयुक्त राष्ट्र महासभा में शनिवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर भारत का नजरिया साफ किया। उन्होंने कहा कि हर देश को यह अधिकार होना चाहिए कि वह अपनी प्राथमिकताओं के हिसाब से एआई सिस्टम विकसित करे और तय करे कि उनका इस्तेमाल किस तरह किया जाए। जयशंकर ने बदलती दुनिया में देशों की ज्यादा भागीदारी और उनकी आवाज को महत्व देने की भी पैरवी की। जयशंकर ने कहा, ‘हम हर देश के अपने इकोसिस्टम को आकार देने के अधिकार में विश्वास करते हैं।’ एआई मॉडल के विकास और उनके इस्तेमाल को लेकर उन्होंने कहा कि देशों को अपने राष्ट्रीय लक्ष्यों के मुताबिक फैसले लेने की आजादी होनी चाहिए। यानी दुनिया के सभी देशों के लिए एआई को विकसित करने और इस्तेमाल करने का कोई एक ही मॉडल जरूरी नहीं है।विदेश मंत्री ने एआई को ऐसी तकनीक बताया जो लोगों को सशक्त बना सकती है, आर्थिक विकास को गति दे सकती है और बड़े स्तर की समस्याओं से निपटने में मदद कर सकती है। उन्होंने फरवरी में भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट का भी जिक्र किया। जयशंकर ने कहा कि भारत एआई को ग्लोबल साउथ के साथ अपनी साझेदारियों का हिस्सा बनाना चाहता है। हालांकि, उन्होंने एआई के गलत इस्तेमाल को लेकर चेतावनी भी दी। उनके मुताबिक, इसका दुरुपयोग पूर्वाग्रह को और गहरा कर सकता है और आपसी सम्मान को कमजोर कर सकता है। जिस तकनीक से कभी उम्मीदें जुड़ी थीं, वही अब चिंता का कारण भी बन रही है।जयशंकर के बयान में राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को खास जगह मिली। उनका कहना था कि किसी देश को यह तय करने की आजादी होनी चाहिए कि वह कौन-से एआई मॉडल विकसित करना चाहता है और उन्हें किस तरह इस्तेमाल करेगा। यानी एआई के क्षेत्र में सभी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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