अपनी पहचान और पुराने रिकॉर्ड को दुरुस्त कराने के लिए दिल्ली के एसआईआर केंद्रों पर लोगों को घंटों कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। किसी के नाम के आगे मृत दर्ज है, तो किसी के पिता के नाम में गड़बड़ी है। किसी का नाम सूची से गायब है, तो कोई पुराने रिकॉर्ड से अपना और परिवार का नाम जोड़ने के लिए दस्तावेजों का पुलिंदा लेकर पहुंच रहा है। मिनटों में पूरा होने वाला काम कई-कई घंटे ले रहा है। कई लोग दो-दो दिन से केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। इस प्रक्रिया का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो रोज कमाकर परिवार चलाते हैं। किसी की कई दिन की दिहाड़ी छूट रही है, तो कोई नौकरी से छुट्टी लेकर सुबह से शाम तक कतार में खड़ा है। मोती नगर के एक एसआईआर केंद्र पर मंगलवार दोपहर बाद भी लंबी कतार लगी रही। कोई गोद में डेढ़ साल की बच्ची लेकर खड़ा था, तो कोई बीमार बेटी को घर पर छोड़कर अपनी बारी का इंतजार कर रहा था।लोगों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के लंच के नाम पर भी लंबे समय तक काम प्रभावित होता है। एक महिला ने परेशान होकर केंद्र पर वीआईपी एंट्री होने का आरोप लगाया और बीएलओ से बहस भी की। हालांकि, केंद्र पर काम में देरी की वजह को लेकर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग शिकायतें थीं।रणजीत नगर बूथ पर अपनी मां के नाम में गड़बड़ी ठीक कराने पहुंचीं नाजिया निजी कंपनी में काम करती हैं। उन्होंने दफ्तर से आधे दिन की छुट्टी ली थी। वह सुबह 11 बजे केंद्र पहुंचीं और दोपहर दो बजे तक कतार में खड़ी रहीं। इस दौरान उनकी बारी नहीं आई और उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि अभी कितना और इंतजार करना पड़ेगा। एसआईआर केंद्रों पर आने वाले लोगों का कहना है कि कई बीएलओ स्कूल की ड्यूटी पूरी करने के बाद दोपहर म …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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