यह फैसला सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद आया है। हमले के कारण पाइपलाइन को बंद करना पड़ा और तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए। इसके चलते लाल सागर के तट पर स्थित यानबू बंदरगाह से तेल की लोडिंग भी प्रभावित हुई। सऊदी अरब ने पहले ही यूरोपीय ग्राहकों को कुछ कच्चे तेल की खेप रद्द होने की जानकारी दी थी।तेल की आपूर्ति में आई इस रुकावट के बाद यूरोपीय रिफाइनरों ने दूसरे स्रोतों से कच्चा तेल जुटाना शुरू कर दिया है। पोलैंड की रिफाइनिंग कंपनी ओर्लेन भी वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश में है। कारोबारियों के मुताबिक, कंपनी ने सऊदी तेल की जगह उत्तरी सागर का कच्चा तेल खरीदा है। इससे पता चलता है कि पाइपलाइन में आए व्यवधान का असर यूरोपीय रिफाइनरों की खरीद पर भी पड़ रहा है।ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अरामको कुछ ही दिनों में पाइपलाइन को आंशिक रूप से फिर शुरू करने और करीब छह सप्ताह में इसे पूरी क्षमता पर वापस लाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, अमर उजाला इस जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करती है।लाल सागर के रास्ते तेल की आपूर्ति में आई कमी को पूरा करने के लिए अरामको ने खाड़ी के रास्ते कच्चे तेल का निर्यात बढ़ाया है। कंपनी ओमान के सोहर बंदरगाह के पास समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल स्थानांतरित कर रही है। इसका मकसद लाल सागर से कम हुई तेल की मात्रा की कुछ हद तक भरपाई करना है।सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले को लेकर अब तक सबसे अहम जानकारी यह है कि ड्रोन इराक की जमीन से लॉन्च किए गए थे। सऊदी विदेश मंत्रालय ने बताया था कि कई ड्रोन ने रियाद और मदीना क्षेत्र में स्थित पाइपलाइन को निशाना बनाया। हमले के बाद पाइपलाइन को ए …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
ड्रोन हमले से सऊदी की पाइपलाइन ठप: यूरोप को अक्तूबर में नहीं मिलेगा अरामको का कच्चा तेल; क्या है वजह?
यह फैसला सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद आया है। हमले के कारण पाइपलाइन को बंद करना पड़ा और तीन पंपिंग स्टेशन क्षतिग्रस्त हुए। इसके चलते लाल सागर के तट पर स्थित यानबू बंदरगाह से तेल की लोडिंग भी प्रभावित हुई। सऊदी अरब ने पहले ही यूरोपीय ग्राहकों को कुछ कच्चे तेल की खेप रद्द होने की जानकारी दी थी।तेल की आपूर्ति में आई इस रुकावट के बाद यूरोपीय रिफाइनरों ने दूसरे स्रोतों से कच्चा तेल जुटाना शुरू कर दिया है। पोलैंड की रिफाइनिंग कंपनी ओर्लेन भी वैकल्पिक आपूर्ति की तलाश में है।