डीटीसी बस चालकों और परिचालकों की हड़ताल के चौथे दिन शुक्रवार को राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर दबाव बना रहा। हालांकि, बृहस्पतिवार की तुलना में शुक्रवार को सड़कों पर बसों की संख्या बढ़ी और करीब 7,500 इलेक्ट्रिक व सीएनजी बसों में से 2,500 से 3,000 बसें चलती दिखाई दीं। इसके बावजूद कई इलाकों में यात्रियों को बसों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। बड़ी संख्या में यात्रियों ने मेट्रो, ऑटो, ई-रिक्शा और कैब का सहारा लिया। राजधानी के करीब 52 डिपो में बस चालक यूनियनों का विरोध जारी रहा। सरकार और यूनियनें अपने-अपने मुद्दों पर अड़ी रहीं। बसों की सीमित उपलब्धता का असर सबसे ज्यादा उन यात्रियों पर पड़ा, जिनके गंतव्य मेट्रो नेटवर्क से सीधे जुड़े नहीं हैं। कई बस स्टॉप और डिपो पर यात्री बस आने का इंतजार करते नजर आए।हड़ताल के चरम पर पहुंचने के दौरान बृहस्पतिवार को दिल्ली मेट्रो ने सार्वजनिक परिवहन का बड़ा हिस्सा संभाला। डीएमआरसी के अनुसार, 17 सितंबर को मेट्रो में 82,44,903 यात्रियों ने बोर्डिंग की। यह मेट्रो में एक दिन में अब तक की सर्वाधिक बोर्डिंग है। इससे पहले सर्वाधिक बोर्डिंग का रिकॉर्ड 8 अगस्त 2025 को दर्ज हुआ था, जब 81,88,115 यात्रियों ने मेट्रो में बोर्डिंग की थी। बृहस्पतिवार का आंकड़ा पुराने रिकॉर्ड से 56,788 अधिक रहा। वहीं, 16 सितंबर को दर्ज 80,71,630 बोर्डिंग की तुलना में 17 सितंबर को करीब 1.73 लाख अधिक यात्रियों ने मेट्रो का इस्तेमाल किया।शुक्रवार को भी मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बनी रही। राजीव चौक, कश्मीरी गेट, बॉटेनिकल गार्डन, पटेल चौक, हौज खास और नई दिल्ली समेत कई स्टेशनों पर यात्रियों की आवाजाही अधिक रही। यात्रियों की बढ़ी संख्या को …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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