भारत में भूजल का संकट लगातार गहरा रहा है। खासकर उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में भूजल स्तर में लंबे समय से गिरावट दर्ज की जा रही है। अब वैश्विक जल संसाधनों पर जारी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की ताजा रिपोर्ट ने इस गिरावट को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। डब्ल्यूएमओ की स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज 2025 रिपोर्ट के मुताबिक भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में भूजल का स्तर लगातार कई वर्षों से सामान्य से नीचे बना हुआ है। इसका सीधा संकेत है कि जमीन से जितना पानी निकाला जा रहा है, प्राकृतिक रूप से उसका उतना पुनर्भरण नहीं हो पा रहा।रिपोर्ट के अनुसार 2022 से 2025 के दौरान अमेरिका, यूरोप, मध्य पूर्व, भारत, दक्षिणी अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में लगातार भूजल की कमी देखी गई। कई क्षेत्रों में अत्यधिक भूजल दोहन को इसका प्रमुख कारण पाया गया।2025 में दुनिया के भूजल निगरानी केंद्रों में से 34% पर सामान्य से कम या बहुत कम भूजल स्तर दर्ज किया गया। 2024 में यह हिस्सा 25% था। यानी एक साल के भीतर सामान्य से कम भूजल वाले निगरानी केंद्रों का अनुपात बढ़ा। इसके उलट 2025 में करीब 31% निगरानी केंद्रों पर सामान्य से अधिक या बहुत अधिक भूजल स्तर दर्ज किया गया।हालांकि डब्ल्यूएमओ ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े उन्हीं क्षेत्रों के हैं, जहां भूजल निगरानी का डेटा उपलब्ध है। इसलिए इन्हें पूरी दुनिया की स्थिति का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता। भूजल स्तर की तुलना 2001 से 2020 के 20 वर्षीय संदर्भ काल से की गई है।डब्ल्यूएमओ के भूजल रुझानों के विश्लेषण में कई वर्षों से जारी सूखे और भूजल में लगातार कमी के बीच संबंध की ओर संकेत किया गया है। 2025 में उत्तरी भारत में जम …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
भारत में तेजी से घट रहा भूजल: 34% निगरानी केंद्रों पर स्तर सामान्य से नीचे, डब्ल्यूएमओ की चेतावनी क्यों अहम?
भारत में भूजल का संकट लगातार गहरा रहा है। खासकर उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में भूजल स्तर में लंबे समय से गिरावट दर्ज की जा रही है। अब वैश्विक जल संसाधनों पर जारी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की ताजा रिपोर्ट ने इस गिरावट को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। डब्ल्यूएमओ की स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज 2025 रिपोर्ट के मुताबिक भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में भूजल का स्तर लगातार कई वर्षों से सामान्य से नीचे बना हुआ है। इसका सीधा संकेत है कि जमीन से जितना पानी निकाला जा रहा है, प्राकृतिक रूप से उ