अमेरिका की ओर से पारित नए व्यापारिक कानून ने भारतीय निर्यातकों और नीति निर्माताओं के बीच भारी अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा हस्ताक्षरित ‘सैनक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ के तहत अमेरिका को रूसी तेल व गैस खरीदने वाले देशों से आयातित सामानों पर 100 प्रतिशत तक का भारी-भरकम टैरिफ लगाने का कानूनी अधिकार मिल गया है। ऐसे समय में जब अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, 100% टैरिफ का यह सीधा खतरा भारत के इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, लेदर और फार्मा जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों के लिए एक बड़े संकट की घंटी बजा रहा है। अमेरिका का नया टैरिफ कानून क्या है और यह कब से लागू होगा? अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा 18 सितंबर को हस्ताक्षरित यह नया कानून वाशिंगटन को मॉस्को के शीर्ष ऊर्जा खरीदारों पर दंडात्मक शुल्क लगाने की शक्तियां देता है। यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर प्रभावी हो जाएगा। भारतीय निर्यातकों की अनिश्चितता और चिंता क्यों बढ़ गई है? कानून के तहत, लागू होने से ठीक पहले के 12 महीनों के दौरान रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस की कुल मात्रा के हिसाब से शीर्ष पांच खरीदार देशों में शामिल राष्ट्रों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 फीसदी तक का आयात शुल्क थोपा जा सकता है। इस मानदंड के कारण भारत और चीन जैसे देश, जो रूसी ऊर्जा के शीर्ष खरीदारों में शामिल हैं, सीधे तौर पर इस कानून की जद में आ रहे हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 6.5 प्रतिशत बढ़कर 140.76 अरब डॉलर (निर्यात 87.3 अरब डॉलर और आयात 53.45 अरब डॉलर) रहा था। वहीं चालू वित्त वर्ष (20 …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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