राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदने वाले तीसरे देशों पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, यह प्रावधान 2025 के विधेयक में प्रस्तावित 500 फीसदी शुल्क के मुकाबले अधिक सीमित है। रूस के प्राकृतिक गैस निर्यात का 15 फीसदी से कम आयात करने वाले और रूसी ऊर्जा पर निर्भरता घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने वाले देशों के लिए छूट का प्रावधान है। अटलांटिक काउंसिल के अनुसार, चीन अगर रूसी तेल खरीदना जारी रखता है तो उसके सामान पर राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाया जा सकता है। विधेयक में रूसी सरकारी अधिकारियों, अरबपतियों, उनके परिवार के कुछ सदस्यों और रूसी वित्तीय संस्थानों को भी निशाना बनाने का प्रावधान है। ट्रंप के अनुरोध पर विधेयक में ईरान के हथियार और ऊर्जा क्षेत्रों की फंडिंग कम करने के उद्देश्य से प्रतिबंध लगाने के अधिकार को भी बढ़ाया गया है। भारत पर अभी 100 फीसदी शुल्क नहीं लगाया गया है। विधेयक राष्ट्रपति को परिस्थितियों के अनुसार ऐसा शुल्क लगाने का अधिकार देता है। विधेयक का सबसे अहम निशाना रूस का ऊर्जा क्षेत्र है। इसका मकसद रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर आर्थिक दबाव बनाकर उसकी ऊर्जा से होने वाली कमाई घटाना है। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदने वाले तीसरे देशों के सामान पर शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकता है। इनमें चीन और भारत जैसे देश भी प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों का घोषित उद्देश्य रूस की उन आय के स्रोतों को कम करना है, जिनसे यूक्रेन के खिलाफ 2022 से जारी युद्ध को फंड किया जा रहा है।भारत और च …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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