यूपीआई पर एमडीआर की नई व्यवस्था क्या है? याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता ने अधिवक्ता आशुतोष दुबे के माध्यम से दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यक्ति से कारोबारी यानी पी2एम यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाया जाएगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। कुछ क्षेत्रों के लिए अलग दरों का भी प्रावधान है। याचिका में भुगतान व्यवस्था की सुरक्षा और मजबूती के उद्देश्य पर सवाल नहीं उठाया गया है, बल्कि आरोप लगाया गया है कि शुल्क लगाने की पूरी प्रक्रिया और उसके आधार को पर्याप्त रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया। याचिका में 2,000 रुपये की सीमा पर क्या सवाल उठाया गया? याचिकाकर्ता ने कहा है कि नई व्यवस्था में अलग-अलग सीमा और श्रेणियां तय की गई हैं, लेकिन उनके पीछे का आंकड़ा और आधार सार्वजनिक नहीं किया गया। याचिका में 2,000 रुपये की सीमा, हर महीने 1 लाख रुपये की यूपीआई प्राप्ति वाली श्रेणी, अलग-अलग क्षेत्रों की शुल्क दर और 75,000 रुपये की अधिकतम सीमा पर सवाल उठाया गया है। याचिका के मुताबिक 2,001 रुपये के लेनदेन पर प्रतिशत के हिसाब से शुल्क लग सकता है, जबकि 2,000 रुपये के लेनदेन पर ऐसा शुल्क नहीं होगा। याचिकाकर्ता ने ऐसी अचानक बदलने वाली सीमाओं को समान स्थिति वाले कारोबारियों के साथ अलग व्यवहार का आधार बताया है। एमडीआर तय करने की प्रक्रिया पर क्या आपत्ति है? याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की है? केंद्र ने एमडीआर लगाने की क्या वजह बताई? छोटे कारोबारियों और आम लोगों के लिए क्या व्यवस्था बताई गई? याचिका में आरोप लगाया गया है कि देशभर में लागू होने वाला आर्थिक बोझ पैदा करने से पहल …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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