प्रधानमंत्री ने देश में पानी बचाने वाली आधुनिक तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय निर्माताओं और हितधारकों को वैश्विक स्तर के बेहतरीन तरीकों से रूबरू कराने के लिए विशेष प्रदर्शनियां और कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर पानी बचाने के कुशल और सस्ते समाधान विकसित करने और उन्हें पूरे देश में लागू करने में मदद मिलेगी।पीएम मोदी ने जन-भागीदारी पर जोर देते हुए लोगों के बीच जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए ‘जल उत्सव’ जैसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की बात कही। इसके साथ ही, जलाशयों और नदियों से गाद निकालने के काम को एक नियमित कार्यक्रम बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि डी-सिल्टिंग के लिए एक स्पष्ट मानदंड और मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की जानी चाहिए ताकि जल भंडारण क्षमता को बरकरार रखा जा सके।बांधों की सुरक्षा पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने हर मानसून से पहले कड़े एहतियाती कदम उठाने और पूरी तैयारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को शुरुआत से ही जल संरक्षण का महत्व समझाने के लिए इसे स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा, विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन और शासन पर शोध व ज्ञान को मजबूत करने का भी सुझाव दिया।प्रधानमंत्री मोदी ने जल क्षेत्र के डेटा को एक समान प्रारूप में एकत्र, प्रबंधित और विश्लेषण करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करने की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि उपचारित पानी का उपयोग कृषि और उद्योगों में करने के लिए अग्रिम और एकीकृत योजना बनाई जानी चाहिए। अपने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल का उदाहरण देते हुए पीएम मो …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
'जल उत्सव को बनाएं जन-आंदोलन': पीएम मोदी बोले- हर बूंद बचाने के लिए अपनाएं आधुनिक टेक्नोलॉजी; और क्या कहा?
प्रधानमंत्री ने देश में पानी बचाने वाली आधुनिक तकनीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि भारतीय निर्माताओं और हितधारकों को वैश्विक स्तर के बेहतरीन तरीकों से रूबरू कराने के लिए विशेष प्रदर्शनियां और कार्यशालाएं आयोजित की जानी चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर पानी बचाने के कुशल और सस्ते समाधान विकसित करने और उन्हें पूरे देश में लागू करने में मदद मिलेगी।पीएम मोदी ने जन-भागीदारी पर जोर देते हुए लोगों के बीच जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 'जल उत्सव' जैसे कार्यक्रम