यह मामला महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के दुर्गापुर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, यह गिरोह बिना परीक्षा दिए लोगों को नामी विश्वविद्यालयों की फर्जी डिग्री और अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्र उपलब्ध कराता था। इसके लिए पांच लाख से दस लाख रुपये तक वसूले जाते थे। पुलिस ने इस मामले में कुछ दिन पहले तुकुम इलाके के रहने वाले परिमल बाबूराव गौरकर और वैभव भोलाराम सोनुले के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज किया था। सोनुले को पुलिस ने शिकायत दर्ज होने के दिन ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि मुख्य आरोपी परिमल गौरकर और उसके साथी अक्षय खोब्रागड़े को शुक्रवार को नागपुर से पकड़ा गया।पुलिस जांच के मुताबिक, इस पूरे रैकेट का राज उस समय खुला, जब तुकुम स्थित चिंतामणि अपार्टमेंट में रहने वाले वैभव मशिरकर के घर रखा एक कपड़े का बैग संदिग्ध लगा। बताया गया है कि आरोपी परिमल गौरकर ने इसी साल जनवरी में यह बैग अपने पड़ोसी मशिरकर के घर सुरक्षित रखने के लिए दिया था। गौरकर बीच-बीच में बैग से कुछ कागजात निकालने के लिए उनके घर आता था। लेकिन कई महीनों तक जब वह बैग लेने नहीं पहुंचा, तो मशिरकर को शक हुआ। उन्होंने बैग खोलकर देखा तो उनके होश उड़ गए। उसमें देश के कई चर्चित विश्वविद्यालयों के नाम से तैयार की गई संदिग्ध मार्कशीट और दूसरे शैक्षणिक दस्तावेज रखे हुए थे।मशिरकर तुरंत इन दस्तावेजों को लेकर दुर्गापुर पुलिस स्टेशन पहुंचे और पुलिस को पूरी जानकारी दी। मशिरकर ने अपने बयान में पुलिस को बताया कि गौरकर पहले भी उनसे दावा कर चुका था कि वह देश के बड़े विश्वविद्यालयों के फर्जी सर्टिफिकेट 5 से 10 लाख रुपये में बनवा सकता है। पुलिस ने जब बैग की तलाशी ली तो उसमें संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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