एक्टिंग: यश हैं, किरदार पीछे छूट गया यश राया और उसके बेटे रूमी, दोनों का डबल रोल निभाते हैं। उनका स्वैग है, चाल है, लुक है, एक्शन है। फैंस को सीटी बजाने के लिए पूरा सामान दिया गया है। लेकिन उनके किरदार बिल्कुल समझ नहीं आते… यश कभी गुस्से में हैं, कभी आशिक हैं, कभी भाई हैं, कभी बाप हैं और फिर अगले ही सीन में किसी की धुनाई कर रहे हैं। इमोशंस आने ही वाली होती है कि कैमरा घूमता है और साहब फिर से स्टाइल में खड़े हैं। नयनतारा जैसी अभिनेत्री से उम्मीद थी कि वह कहानी को भावनात्मक वजन देंगी, लेकिन उनका किरदार देखकर लगता है कि इतनी बड़ी अभिनेत्री को भी फिल्म ने कह दिया…. आप बस भाई को संभालिए, भारी-भरकम डायलॉग बोलिए… बाकी हम देखते हैं। कियारा आडवाणी की बात करें तो कैमरे ने उन्हें बहुत प्यार दिया है। इतना प्यार कि कई बार लगता है कि नादिया किरदार नहीं, फिल्म की ग्लैमर एम्बेसडर हैं। सर्कस, ग्लैमरस कपड़े, मर्मेड एक्ट, एरियल एक्ट, खूबसूरत शॉट्स- सबकुछ है। बस किरदार को हल्का और विस्तार से लिख दिया जाता तो शायद ऑडियंस और भी खुश होतीं। हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय, संजीदा शेख और रुक्मिणी वसंत जैसे कलाकारों को देखकर लगता है कि कास्टिंग डायरेक्टर ने बहुत मेहनत की थी। फिर स्क्रीनप्ले ने आकर सबकी मेहनत से कहा- थैंक यू, अब आप पीछे बैठिए। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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