केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में आसूचना ब्यूरो के ‘राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन’ (NSS Conference) के समापन सत्र में कहा, ये देश धर्मशाला नहीं है। यहां देश के नागरिकों को ही रहने का अधिकार है। घुसपैठिए देश की सुरक्षा, अर्थतंत्र और जनसांख्यिकी परिवर्तन तीनों के लिए खतरा हैं। गृह मंत्री शाह ने कहा, पहले की सरकारों ने नारकोटिक्स, नक्सलवाद और नॉर्थ ईस्ट की समस्याओं को विकराल होने से पहले ही संभाल लिया होता तो देश को दशकों तक इनका दंश न झेलना पड़ता। मौजूदा सरकार ने आंतरिक सुरक्षा के इन तीनों हॉटस्पॉट में खड़ी चुनौती को समाप्त किया है। इसका संपूर्ण यश हर राज्य की पुलिस फोर्स, केंद्रीय एजेंसियों और सीएपीएफ को जाता है। शाह ने कहा, पीएम मोदी ने 2047 में विकसित भारत का लक्ष्य रखा है। विकसित भारत की पहली शर्त है मजबूत आंतरिक सुरक्षा। हर क्षेत्र में सर्वप्रथम बनना है तो आंतरिक सुरक्षा और सुदृढ़ करनी ही पड़ेगी। ‘राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन’, का यह फोरम आने वाले 15-20 वर्षों के ट्रेंड्स देखकर तय करे कि कौन-सी समस्या उठ सकती है और उसे रोकने की रणनीति क्या हो। अगले एक वर्ष में तीनों न्याय संहिताओं का शत प्रतिशत क्रियान्वयन होगा, जिससे तीन साल के अंदर क्रिमिनल केसों का सुप्रीम कोर्ट तक निपटारा हो सके। इसके चलते केसों की दोष सिद्धि दर में 25 फीसदी की वृद्धि होगी।गृह मंत्री ने कहा, पिछले आठ माह में सभी भूमि-सीमा राज्यों का दौरा कर एक चतुष्कोणीय सीमा सुरक्षा दृष्टिकोण का दस्तावेज, राज्यों के साथ साझा किया गया है। बहुत कम समय में देश को घुसपैठिया मुक्त बनाना, केंद्र सरकार का लक्ष्य है। पीएफआई पर एक ही रात में स्ट्राइक कर उसे बैन कर दि …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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