हड़ताल पर बैठे ड्राइवरों ने अपनी पीड़ा जाहिर की है। एक ड्राइवर ने कहा, ‘यह तीन दिवसीय ऑटो-रिक्शा हड़ताल है। हमारी कोई नहीं सुन रहा है। अगर आप 60 साल के व्यक्ति को अचानक मराठी बोलने के लिए कहेंगे, तो वे यह कैसे करेंगे? हम न्याय चाहते हैं।’ एक अन्य ड्राइवर ने कहा, ‘हम 55-60 साल के हैं। हम कभी स्कूल नहीं गए। हम मराठी कैसे बोल सकते हैं? हम टूटी-फूटी मराठी बोलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उस पर भी विचार नहीं किया जा रहा है, इसके बजाय हम पर जुर्माना लगाया जा रहा है। क्या हम 15,000-20,000 रुपये का जुर्माना भर सकते हैं?‘महाराष्ट्र में लंबे समय से स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने की मांग होती रही है। सरकार का तर्क है कि ड्राइवरों को स्थानीय मराठी भाषा का ज्ञान होना चाहिए ताकि वे यात्रियों के साथ बेहतर संवाद कर सकें। पहले भी ऑटो-टैक्सी परमिट के लिए मराठी भाषा की जानकारी एक शर्त रही है, लेकिन इसका सख्ती से पालन नहीं होता था। अब सरकार ने इसे सख्ती से लागू करने का फैसला किया है और नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया है। यह ही विवाद की मुख्य वजह बन गया है।इस मामले में शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा, ‘महाराष्ट्र सरकार ने एक आदेश जारी किया है जिसमें कहा गया है कि मुंबई और एमएमआर क्षेत्र के सभी ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों को मराठी भाषा का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए। इसे 1 मई से लागू किया जाना था, लेकिन ड्राइवरों को मराठी सीखने के लिए समय दिया गया। 85% से अधिक ड्राइवरों ने मराठी का बुनियादी ज्ञान प्राप्त कर लिया है। 12 अगस्त को एक महीने का अतिरिक्त विस्तार दिया गया था। हालांकि, आरटीओ अधिकारी ऑटो ड्राइवरों को परेशान कर रहे हैं। इसीलिए मैं इस मुद्दे को लेकर मंत्री प्र …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
मुंबई में थमे ऑटो-टैक्सी के पहिए: ड्राइवरों का दर्द- 60 की उम्र में कैसे सीखें मराठी, रोजी-रोटी पर आया संकट
हड़ताल पर बैठे ड्राइवरों ने अपनी पीड़ा जाहिर की है। एक ड्राइवर ने कहा, 'यह तीन दिवसीय ऑटो-रिक्शा हड़ताल है। हमारी कोई नहीं सुन रहा है। अगर आप 60 साल के व्यक्ति को अचानक मराठी बोलने के लिए कहेंगे, तो वे यह कैसे करेंगे? हम न्याय चाहते हैं।' एक अन्य ड्राइवर ने कहा, 'हम 55-60 साल के हैं। हम कभी स्कूल नहीं गए। हम मराठी कैसे बोल सकते हैं? हम टूटी-फूटी मराठी बोलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उस पर भी विचार नहीं किया जा रहा है, इसके बजाय हम पर जुर्माना लगाया जा रहा है। क्या हम 15,000-20,000 रुपये का जुर्