1 of 5 यूपी में गंगा का रौद्र रूप - फोटो : अमर उजाला खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें यह खबर एप पर पढ़ें या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो देखें संक्षिप्त देखें लोड हो रहा है अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े जा रहे लाखों क्यूसेक पानी के कारण गंगा, यमुना समेत कई नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। राज्य के कई जिलों में बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। खेतों से लेकर आबादी वाले इलाकों और धार्मिक घाटों तक पानी भर गया है। 2 of 5 जलस्तर बढ़ने के कारण मणिकर्णिका घाट का बदला गया शवदाह स्थल - फोटो : अमर उजाला वाराणसी: 84 घाट डूबे, मणिकर्णिका की छत पर हो रहा शवदाह काशी में गंगा और वरुणा नदी दोनों उफान पर हैं। गंगा खतरे के निशान से मात्र 1.24 मीटर नीचे है। शहर के सभी 84 घाट पूरी तरह डूब चुके हैं। अस्सी घाट पर ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच और नमो घाट जलमग्न हो गए हैं और नौका संचालन ठप है। जलस्तर बढ़ने से शवदाह में भारी परेशानी आ रही है। महाश्मशान मणिकर्णिका घाट की छत और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। लकड़ियां गीली होने और जगह कम होने के कारण परिजनों को 2 से 3 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। 3 of 5 प्रयागराज में तेजी से बढ़ रहा है गंगा और यमुना का जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला। प्रयागराज: खतरे की ओर बढ़ता जलस्तर, 180 लोग राहत शिविर में कानपुर, नरौरा और हरिद्वार से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के कारण संगम नगरी में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। फाफामऊ, छतनाग और नैनी में गंगा-यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। यमुनापार के …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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