विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि 2020 की गर्मियों से 2024 की शरद ऋतु तक भारत-चीन संबंध बेहद खराब दौर से गुजरे। इसके पीछे मुख्य वजह सीमा क्षेत्रों की स्थिति थी। उन्होंने कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है। सीमा की स्थिति बड़े स्तर पर दोनों देशों के संबंधों की दिशा तय करती है।विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि दुनिया प्रतिस्पर्धी है और भारत को अपनी ताकत बढ़ानी होगी। भारत को पूरी दुनिया के साथ कारोबार करना है और इसमें चीन भी शामिल है। लेकिन चीन के साथ आत्मविश्वास से व्यवहार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने रुख पर मजबूती से कायम रहना होगा, जैसा उसने सीमा पर किया है। जयशंकर के मुताबिक, चीन ने भारत की तुलना में बहुत तेजी से बड़े पैमाने पर और पहले औद्योगीकरण किया।विदेश मंत्री ने कहा कि भारत आधी सदी पहले विनिर्माण और औद्योगीकरण को गहरा करने के अवसर का बेहतर उपयोग कर सकता था। अब देश को अपनी कमियों को दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि एक मजबूत, अधिक आत्मनिर्भर, ज्यादा औद्योगिक और विनिर्माण क्षमता वाला भारत चीन के साथ ही दुनिया के अन्य बड़े देशों से भी प्रतिस्पर्धा कर सकेगा। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत ने चीन के समक्ष वीजा संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे भारतीय कारोबारियों के मुद्दे उठाए हैं।जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में भारी तनाव आया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध चार साल से ज्यादा समय तक चला। अक्टूबर 2024 में दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक, दो आखिरी टकराव वाले क्षेत्रों से जुड़े डिसएंगेजमेंट समझौते को अंतिम रूप दिया। इसके कुछ दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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