Khabaron Ke Khiladi: दिमागी नक्सल पर घमासान, विश्लेषकों ने बताया ये नया नैरेटिव या देश सुरक्षा का गंभीर मुद्दा पीयूष पंत: प्रधानमंत्री का ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पुरानी बात को नए पैकेट में पेश करने जैसा है। जब भी सरकार की आलोचना होती है, उसे अति-वामपंथ के व्याकरण में रखकर निशाना बनाया जाता है। पहले इसे ‘अर्बन नक्सल’ कहते थे और अब ‘दिमागी नक्सल’ का रूप दे दिया गया है। जो लोग रिएक्ट करते हैं, जो क्रिटिकल एप्रेजल करते हैं, जो आपकी बातों को आलोचनात्मक रूप से एनलाइज करते हैं उसके खिलाफ दुनियाभर की दक्षिणपंथ की विचारधारा हमेशा से रही है। ये एक तरह से क्रिटिकल थॉट को टारगेट करने की कोशिश है। प्रधानमंत्री का ‘दिमागी नक्सल’ शब्द पुरानी बात को नए पैकेट में पेश करने जैसा है। जब भी सरकार की आलोचना होती है, उसे अति-वामपंथ के व्याकरण में रखकर निशाना बनाया जाता है। पहले इसे ‘अर्बन नक्सल’ कहते थे और अब ‘दिमागी नक्सल’ का रूप दे दिया गया है। जो लोग रिएक्ट करते हैं, जो क्रिटिकल एप्रेजल करते हैं, जो आपकी बातों को आलोचनात्मक रूप से एनलाइज करते हैं उसके खिलाफ दुनियाभर की दक्षिणपंथ की विचारधारा हमेशा से रही है। ये एक तरह से क्रिटिकल थॉट को टारगेट करने की कोशिश है। स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया। इसके बाद से इस शब …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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