ईडी ने अदालत को बताया कि शिकोहपुर जमीन सौदे में डीएलएफ की भूमिका से जुड़े मामले की जांच जारी है। इस बीच, जांच एजेंसी ने आरोपियों को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं।ईडी ने दस्तावेजों की सूची उपलब्ध कराने के लिए अदालत से तीन सप्ताह का समय मांगा। एजेंसी ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है। अदालत ने ईडी को समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ा गुरुग्राम के शिकोहपुर जमीन सौदे का मामला करीब डेढ़ दशक पुराना है। अब यह मामला प्रवर्तन निदेशालय की मनी लॉन्ड्रिंग जांच और अदालत की कार्रवाई के कारण फिर चर्चा में है। अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने ED की ओर से दाखिल अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेते हुए वाड्रा और अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्यवाही के लिए पर्याप्त सामग्री होने की बात कही।मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में करीब 3.53 एकड़ जमीन से जुड़ा है। फरवरी 2008 में रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने यह जमीन ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी। ईडी का आरोप है कि जमीन की खरीद के समय बिक्री दस्तावेज में भुगतान को लेकर गलत जानकारी दी गई थी। एजेंसी के मुताबिक, जिस चेक से भुगतान दिखाया गया था, वह दूसरी कंपनी से जुड़ा था और उसे कभी भुनाया ही नहीं गया।इसके बाद जमीन के इस्तेमाल के लिए वाणिज्यिक लाइसेंस की प्रक्रिया हुई। ईडी का आरोप है कि नियमों को दरकिनार करते हुए लाइसेंस दिलाने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया गया। जमीन का लाइसेंस और विकास की संभावनाएं बढ़ने के बाद उसकी कीमत में काफी इजाफा हुआ। जून 2008 में डीएलएफ ने इस जमीन को करीब 58 करोड़ रुपये म …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में जांच जारी: ED ने कोर्ट में दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट, मांगा और समय
ईडी ने अदालत को बताया कि शिकोहपुर जमीन सौदे में डीएलएफ की भूमिका से जुड़े मामले की जांच जारी है। इस बीच, जांच एजेंसी ने आरोपियों को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं।ईडी ने दस्तावेजों की सूची उपलब्ध कराने के लिए अदालत से तीन सप्ताह का समय मांगा। एजेंसी ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है। अदालत ने ईडी को समय देते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।रॉबर्ट वाड्रा से जुड़ा गुरुग्राम के शिकोहपुर जमीन सौदे का मामला करीब डेढ़ दशक पुराना है। अब यह मामला प्रवर्तन निदेशालय की म