लेकिन राहुल गांधी आखिर इस मुद्दे पर बार-बार सड़क पर क्यों उतर रहे हैं? इसकी कहानी सिर्फ पैलेट गन के आरोप या एक घायल छात्र तक सीमित नहीं है।सीजेपी यानी कॉकरेज जनता पार्टी का आंदोलन शुरुआत में पारंपरिक राजनीतिक दलों से अलग एक युवा आंदोलन के रूप में सामने आया। इसका केंद्र परीक्षा व्यवस्था, कथित पेपर लीक और युवाओं की नाराजगी थी। नीट-यूजी परीक्षा से जुड़े विवाद के बाद यह आंदोलन लगातार बड़ा होता गया। युवाओं के बीच परीक्षा में कथित अनियमितताओं और व्यवस्था के खिलाफ नाराजगी पहले से थी। सीजेपी ने इसी गुस्से को संगठित आंदोलन का रूप दिया।सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से धीरे-धीरे यह आंदोलन सिर्फ परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। इसमें युवाओं के भविष्य, जवाबदेही और सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे। आंदोलन को सोशल मीडिया से भी बड़ी ताकत मिली और दिल्ली समेत कई जगहों पर इसका असर दिखाई दिया। प्रसिद्ध शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 28 जून से 24 जुलाई 2026 तक लगातार 26 दिनों तक भूख हड़ताल की।आंदोलन का सबसे बड़ा मोड़ 20 जुलाई को आया। सीजेपी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र और युवा दिल्ली में संसद की ओर मार्च के लिए पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ गए और पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पुलिस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए। पुलिस ने भी प्रदर्शनकारियों पर हिंसा और कानून व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप लगाए। यहीं से छात्र आंदोलन एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में बदल गया।प्रदर्शनकारियों और विपक्ष ने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। आंसू गैस, लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठाए ग …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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