बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत की संख्या भले ही प्रशासन आठ बता रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और ही तस्वीर सामने आने की बात कही जा रही है। करीब 21 से अधिक बच्चों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। इन घटनाओं के पीछे शासन-प्रशासन की लापरवाही के साथ ही मूलभूत सुविधाओं का अभाव भी प्रमुख कारण बताया जा रहा है।बालाघाट के बैहर एवं बिरसा विकासखंड में दूषित पानी और कुपोषण के कारण बच्चों की हालत पहले से ही ठीक नहीं थी। धीरे-धीरे कुपोषण और गंदगी का असर दिखाई देने लगा और एक-एक करके बच्चों की मौत के मामले सामने आने लगे। इसके बाद जुलाई महीने में अलग-अलग कारणों से कई बच्चों की मौत हुई। तब प्रशासन स्वास्थ्य और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर हरकत में आया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।बालाघाट के कई क्षेत्रों में पहाड़ी और ग्रामीण इलाका होने के कारण ग्रामीणों तक पानी की पर्याप्त सुविधा नहीं पहुंच पाई है। जहां सरकार ने नल-जल योजना के तहत पानी की सुविधा उपलब्ध कराई भी है, वहां कई जगह पानी नहीं मिल पाता। मजबूरन ग्रामीण नालों और डोबरों से पानी निकालकर उसे छानकर पीने को मजबूर होते हैं। ऐसे पानी में मौजूद संक्रमित जीवाणु और बैक्टीरिया उनके स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। दूषित पानी और कुपोषण का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है।ये भी पढ़ें-बालाघाट जिले में संक्रमण और कुपोषण के चलते सरकारी आंकड़ों के अनुसार आठ बच्चों ने अपनी जान गंवाई है। हालांकि, जमीनी स्तर पर आंकड़े इससे अलग होने का दावा किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक 207 लोगों का जिला चिकित्सालय में इलाज किया गया है, जिनमें से 163 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं। वहीं, 44 मरीजों क …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
MP: खतरे में 4338 बच्चों की जान, 44 अब भी अस्पताल में भर्ती; बालाघाट में बैगा मासूमों पर क्यों मंडरा रहा संकट?
बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत की संख्या भले ही प्रशासन आठ बता रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति कुछ और ही तस्वीर सामने आने की बात कही जा रही है। करीब 21 से अधिक बच्चों की मौत होने का दावा किया जा रहा है। इन घटनाओं के पीछे शासन-प्रशासन की लापरवाही के साथ ही मूलभूत सुविधाओं का अभाव भी प्रमुख कारण बताया जा रहा है।बालाघाट के बैहर एवं बिरसा विकासखंड में दूषित पानी और कुपोषण के कारण बच्चों की हालत पहले से ही ठीक नहीं थी। धीरे-धीरे कुपोषण और गंदगी का असर दिखाई देने लगा और एक-एक करके बच्चों की मौत के मामले सा