इसमें एससी-एसटी, ओबीसी छात्रों और अध्यापकों के लिए क्या है? इन नियमों को लागू करने के लिए हर विश्वविद्यालय में एक समान अवसर केंद्र, एक समता समिति और समता समूह बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही कई और नियम भी हैं, इन्हें एक-एक करके समझते हैं… आरक्षित छात्रों और अध्यापकों की सुरक्षा के लिए नियम: समान अवसर केंद्र- प्रत्येक संस्थान को वंचित समूहों के लिए नीतियों के प्रभावी कार्यान्वयन की निगरानी के लिए समान अवसर केंद्र स्थापित करने होंगे। इसमें संस्थान के पांच फैकल्टी सदस्य होंगे। इन पांच सदस्यों के लिए किसी भी कैटेगरी के लिए कोई आरक्षण नहीं है। समता समिति- समान अवसर केंद्र को एक समता समिति बनानी होगी। इसके अध्यक्षता संस्थान के प्रमुख होंगे। इसमें एससी, एसटी, ओबीसी, विकलांगों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व भी अनिवार्य होगा। इस समिति में कुल दस सदस्य होंगे। समता समूह- प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान निगरानी रखने तथा परिसर में किसी भी भेदभाव को रोकने के लिए एक छोटी इकाई भी गठित करेगा, जिसे ‘समता समूह (इक्विटी स्क्वॉड)’ कहा जाएगा। उच्च शिक्षण संस्थान आवश्यक संख्या में समता समूह गठित कर सकता है, और ऐसे समूह गतिशील रहेंगे तथा संवेदनशील स्थानों पर नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे। विश्वविद्यालय में दाखिले के समय सभी छात्रों को किसी भी तरह के भेदभाव नहीं करने के लिए एक घोषणा-पत्र देना होगा। संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि छात्रावास आवंटन, कक्षाओं या मेंटरशिप समूहों के चयन में किसी भी तरह का भेदभाव न हो और पूरी प्रक्रिया निष्पक्षता के साथ हो। छात्रों के लिए 24/7 समता हेल्पलाइन और भेदभाव की रिपोर्ट करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाना होगा। प्रत्येक विभाग में ‘समता द …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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