अब कौन-कौन से काम जिलाधिकारी कर सकेंगे? लंबित आवेदनों का क्या होगा? नागरिकता पाने के लिए क्या शर्तें रखी गई हैं? किन इलाकों में लागू होंगे नए नियम? नए नियमों के अनुसार जिलाधिकारी नागरिकता के लिए मिलने वाले आवेदनों को ऑनलाइन प्राप्त करेंगे, उनकी जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर आवेदक से जुड़ी जानकारी की पड़ताल भी करेंगे। यदि जांच के बाद आवेदक को नागरिकता के लिए योग्य और उपयुक्त पाया जाता है तो जिलाधिकारी सीधे भारतीय नागरिकता देने के लिए अधिकृत होंगे। पहले ये अधिकार सशक्त समितियों और नामित अधिकारियों के पास थे। अब इनकी जगह जिलाधिकारी सक्षम प्राधिकारी होंगे।जिन मामलों पर पहले से प्रक्रिया चल रही है और जो सशक्त समितियों या जिला स्तरीय समितियों के पास लंबित हैं, उन्हें संबंधित जिलाधिकारियों को तत्काल भेजा जाएगा। आवेदन जमा होने के बाद व्यवस्था के तहत आवेदक को स्वत: पावती भी मिलेगी। इसके बाद जिलाधिकारी दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे और नागरिकता कानून के तहत आवेदक की पात्रता की जांच करेंगे। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त पूछताछ भी की जा सकेगी।नए नियमों में आवेदक की व्यक्तिगत मौजूदगी को लेकर भी सख्ती रखी गई है। आवेदक को आवेदन पर हस्ताक्षर करने और भारत के प्रति निष्ठा की शपथ लेने के लिए खुद उपस्थित होना होगा। यदि उचित अवसर दिए जाने के बावजूद आवेदक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होता है तो जिलाधिकारी उसका आवेदन खारिज कर सकते हैं। यानी केवल ऑनलाइन आवेदन करने से नागरिकता नहीं मिलेगी, बल्कि दस्तावेजों और पात्रता की पूरी जांच के बाद अंतिम प्रक्रिया पूरी करनी होगी।यह व्यवस्था गुजरात, राजस्थान, पंजाब, पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा के अलावा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लागू …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
नागरिकता नियमों में बड़ा बदलाव: सीमावर्ती राज्यों के डीएम को मिला नागरिकता देने का अधिकार, क्या है नियम?
अब कौन-कौन से काम जिलाधिकारी कर सकेंगे? लंबित आवेदनों का क्या होगा? नागरिकता पाने के लिए क्या शर्तें रखी गई हैं? किन इलाकों में लागू होंगे नए नियम? नए नियमों के अनुसार जिलाधिकारी नागरिकता के लिए मिलने वाले आवेदनों को ऑनलाइन प्राप्त करेंगे, उनकी जांच करेंगे और जरूरत पड़ने पर आवेदक से जुड़ी जानकारी की पड़ताल भी करेंगे। यदि जांच के बाद आवेदक को नागरिकता के लिए योग्य और उपयुक्त पाया जाता है तो जिलाधिकारी सीधे भारतीय नागरिकता देने के लिए अधिकृत होंगे। पहले ये अधिकार सशक्त समितियों और नामित अधिकारियों