आलमगीर (78 वर्षीय) सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के उम्मीदवार हैं। वहीं, अहमद (84 वर्षीय)लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के अध्यक्ष हैं। वह जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने 16 अगस्त को दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को सही मानते हुए मंजूर कर लिया था।बांग्लादेश में 1991 के बाद यह पहला राष्ट्रपति चुनाव है, जिसमें उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हो रहा है। पिछले कई दशकों में राष्ट्रपति का चुनाव आमतौर पर आपसी सहमति से या बिना मुकाबले के होता रहा है।बीएनपी की संसदीय दल की बैठक में बुधवार को आलमगीर ने पार्टी के सांसदों से राष्ट्रपति चुनाव में उन्हें वोट देने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘अगर मैंने कोई गलती की है या अनजाने में किसी को दुख पहुंचाया है, तो मैं माफी मांगता हूं।‘आलमगीर बीएनपी में संयुक्त महासचिव, कार्यवाहक महासचिव और महासचिव जैसे पदों पर रह चुके हैं। बैठक में मौजूद कई सांसदों ने बताया कि वरिष्ठ नेता भावुक हो गए और कई बार उनकी आंखों से आंसू निकल आए। आलमगीर ने वादा किया कि वह देश की आजादी और संप्रभुता से कभी समझौता नहीं करेंगे।डेली स्टार अखबार ने संसद सचिवालय के सूत्रों के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति चुनाव जीतने वाले उम्मीदवार शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगे। यह राष्ट्रपति चुनाव इसलिए जरूरी हुआ, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबी माने जाने वाले मोहम्मद शहाबुद्दीन ने पिछले महीने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था। उनका पांच साल का कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ था।प्रधानमंत्री और बीएनपी के अध्यक्ष ता …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव आज: किसका किससे है मुकाबला, कौन दौड़ में सबसे आगे? जानिए समीकरण
आलमगीर (78 वर्षीय) सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के उम्मीदवार हैं। वहीं, अहमद (84 वर्षीय)लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के अध्यक्ष हैं। वह जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने 16 अगस्त को दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को सही मानते हुए मंजूर कर लिया था।बांग्लादेश में 1991 के बाद यह पहला राष्ट्रपति चुनाव है, जिसमें उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हो रहा है। पिछले कई दशकों में राष्ट्रपति का चुनाव आमतौर पर आपसी सहमति से