‘इंडिया नैरेटिव’ की एक रिपोर्ट में कहा गया, “पाकिस्तान पहले ही मानव रहित हवाई प्रणालियों के तेजी से विस्तार और स्थानीय उत्पादन को ‘राष्ट्रीय प्राथमिकता’ घोषित कर चुका है। इस्लामाबाद का लक्ष्य ऐसे रक्षा उद्योग से तकनीकी जानकारी हासिल करना है, जिसे युद्ध ने लंबी दूरी के हमले, नेविगेशन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, मजबूती और बड़े पैमाने पर उत्पादन जैसे क्षेत्रों में तेजी से नवाचार करने के लिए मजबूर किया है। इसके लिए वह निजी वाणिज्यिक कंपनियों के साथ काम कर रहा है।“रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान ने रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी को पहले ही बढ़ावा दिया है। घरेलू कंपनियों ने स्वदेशी यूएवी पर अपना काम बढ़ाया है, जिसमें स्थानीय स्तर पर विकसित इंजन और प्रोपल्शन प्रणालियों का परीक्षण भी शामिल है।रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में युद्ध से मिले अनुभवों को देखते हुए पाकिस्तान ने अपने सैन्य ड्रोन बेड़े का भी विस्तार किया है। ऐसे में आयात किए जाने वाले ड्रोन की संख्या से ज्यादा प्रशिक्षण, उत्पादन में सहायता, कलपुर्जे, सॉफ्टवेयर, निर्माण तकनीक और संचालन का अनुभव महत्वपूर्ण हो सकता है।रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन की प्रमुख ड्रोन और मिसाइल निर्माता कंपनी फायर पॉइंट द्वारा पाकिस्तान को अपनी तकनीक और युद्ध के अनुभव की पेशकश किए जाने की संभावना से भारत का रणनीतिक बढ़त का पारंपरिक लाभ दबाव में आ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि किसी संभावित ड्रोन समझौते से भारत की सुरक्षा चुनौतियों में एक नया पहलू जुड़ सकता है।रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की दिलचस्पी अब केवल पाकिस्तान द्वारा फायर पॉइंट के संभावित ड्रोन हासिल करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उसे यह भी देखना चाहिए कि क्या …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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