दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने अपनी 11 पन्नों की फाइनल फोरेंसिक रिपोर्ट में पुष्टि की है कि शव पर मारपीट या संघर्ष के कोई निशान नहीं थे, जो किसी भी तरह से हत्या की ओर संकेत करें। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के 22 मई के आदेश पर, एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता के नेतृत्व में मेडिकल बोर्ड ने 24 मई को त्विषा के शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया था। बोर्ड ने तमाम पहलुओं की बारीकी से जांच करने के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि यह मामला आत्महत्या का ही है। 10 जुलाई को सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई यह रिपोर्ट अब सार्वजनिक हो गई है। ये भी पढ़ें- साजिश नहीं, प्रताड़ना का नतीजा भले ही जांच एजेंसी ने हत्या के आरोपों को खारिज कर दिया हो, लेकिन सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में त्विषा की सास, पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और पति अधिवक्ता समर्थ सिंह को दोषी माना है। सीबीआई की जांच में यह सिद्ध हुआ है कि ससुराल पक्ष द्वारा की गई दहेज प्रताड़ना ही त्विषा की मौत का मुख्य कारण बनी। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा धारा 80 (2) यानी दहेज हत्या, धारा 85 यानी पति या रिश्तेदारों द्वारा महिला के साथ क्रूरता, धारा 108 यानी आत्महत्या के लिए उकसाना और धारा 3 (5) यानी दहेज का लेनदेन के अलावा, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत प्रकरण में चालान प्रस्तुत किया है। 12 मई की शाम शुरू हुआ कॉल और मैसेज का सिलसिला सीबीआई के मुताबिक 12 मई की शाम करीब 7:51 बजे ट्व …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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