विवेचना के दौरान अब पुलिस गवाहों के बयानों में अपनी ओर से शब्द नहीं डाल सकेगी। डीजीपी राजीव कृष्णा ने इस संबंध में प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। गवाह जो बात अपनी बोली और भाषा में बताएंगे, विवेचक को उसे उसी रूप में दर्ज करना होगा। अभियुक्त के खिलाफ आरोप गढ़ने या उसे दोषी ठहराने वाले सवाल नहीं पूछे जा सकेंगे। नियमों की अनदेखी करने पर विवेचक के साथ पर्यवेक्षण अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी। ये निर्देश इलाहाबाद हाईकोर्ट के 30 जुलाई 2026 के आदेश के अनुपालन में जारी हुए हैं। कोर्ट ने आतिश उर्फ कृष्णकांत बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई की थी। इस मामले में पीड़ित और उसकी पत्नी के ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डेड बयानों में अंतर पाया गया था। विवेचक ने गवाहों के वास्तविक कथनों के बजाय अपनी ओर से कथन जोड़े थे। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को अनुचित मानते हुए डीजीपी को दिशा-निर्देश जारी करने को कहा था। डीजीपी ने थानों के विवेचकों और पुलिसकर्मियों के लिए कार्यशालाएं आयोजित कराने को भी कहा है। इन कार्यशालाओं में आपराधिक कानून और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 180 के तहत विवेचक सूचक सवाल नहीं पूछेंगे। इनका मकसद आरोपी के खिलाफ कोई तथ्य निकलवाना या आरोप मजबूत करना नहीं होगा। जरूरत पड़ने पर किसी बात को स्पष्ट करने के लिए सवाल किया जा सकता है। हालांकि, गवाह को किसी उत्तर का सुझाव नहीं दिया जाएगा। गवाह ने जिस भाषा या बोली में घटना बताई है, बयान उसी में दर्ज होगा।डीजीपी ने विवेचना में डिजिटल साक्ष्यों के इस्तेमाल पर भी निर्देश दिए हैं। तलाशी, जब्ती, निरीक्षण और अन्य कार्रवाई के दौरान तैयार डिजिटल सा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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