न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ ने कई निर्देश जारी करते हुए कहा, “इस पसंद को प्रभावित करने वाले किसी भी बाहरी कारक में लोकतंत्र के मूल स्वरूप को कमजोर करने की क्षमता है।” पीठ ने कहा कि जब अवैध धन शामिल होता है तो व्यक्ति की ओर से किया गया चुनाव स्वतंत्र नहीं रहता। उसकी पसंद मौद्रिक या अन्य तरह के लाभ से प्रभावित हो जाती है। कभी ये लाभ वास्तविक होते हैं तो कभी भ्रामक वादों के रूप में होते हैं।पीठ ने कहा, “चुनावी प्रक्रिया में काला धन, यानी जिस मुद्दे पर हम यहां विचार कर रहे हैं, ऐसा ही एक पहलू है जो लोकतंत्र, कानून के शासन और खुद चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करता है।” शीर्ष अदालत ने कहा कि लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया में संदिग्ध धन के प्रसार और उसे दूषित करने का मुद्दा कोई हाल की घटना नहीं है। इसे बार-बार पहचाना गया है।चुनाव प्रक्रिया के दौरान नकदी और संपत्ति की जब्ती का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि “जब्ती करने वाले प्राधिकारी को 24 घंटे के भीतर इसकी सूचना जिला मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम क्षेत्राधिकार वाली अदालत को देनी होगी।” साथ ही लिखित कारणों में यह बताना होगा कि जब्त नकदी या अन्य संपत्ति का संदिग्ध चुनावी अपराध से प्रथम दृष्टया क्या संबंध है।पीठ की ओर से फैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति संजय करोल ने कहा कि जब प्राथमिकी दर्ज हो जाती है तो जांच अधिकारी को हर संभव प्रयास करके एक साल के भीतर जांच पूरी करनी होगी। पीठ ने निर्देश दिया, “यदि यह समयसीमा पार होती है तो इसके कारण दर्ज किए जाएंगे और भारत निर्वाचन आयोग को बताए जाएंगे।“यह आदेश कर्नाटक सरकार की ओर से दायर एक याचिका पर आया। यह मामला 2014 के लोकसभ …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
चुनाव में काले धन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: जब्ती की सूचना 24 घंटे में देने का निर्देश, और क्या कहा?
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ ने कई निर्देश जारी करते हुए कहा, "इस पसंद को प्रभावित करने वाले किसी भी बाहरी कारक में लोकतंत्र के मूल स्वरूप को कमजोर करने की क्षमता है।" पीठ ने कहा कि जब अवैध धन शामिल होता है तो व्यक्ति की ओर से किया गया चुनाव स्वतंत्र नहीं रहता। उसकी पसंद मौद्रिक या अन्य तरह के लाभ से प्रभावित हो जाती है। कभी ये लाभ वास्तविक होते हैं तो कभी भ्रामक वादों के रूप में होते हैं।पीठ ने कहा, "चुनावी प्रक्रिया में काला धन, यानी जिस मुद्दे पर हम यहां विचार कर रहे