17 से 31 अगस्त तक इन इलाकों के लोग ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद 1 सितंबर से 30 सितंबर तक जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर लोगों की जानकारी दर्ज करेंगे। इस बार कर्मचारियों को 40 सवाल पूछने होंगे। इनमें पहली बार जाति से जुड़ा सवाल भी होगा। माता-पिता की जानकारी और पहचान से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी पूछा जाएगा। देश के बाकी हिस्सों में लोगों की गिनती अगले साल फरवरी में होगी। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के जनगणना संचालन के मुख्य अधिकारी और निदेशक अमित शर्मा ने बताया कि इस बार जानकारी कागज पर कम और डिजिटल तरीके से ज्यादा दर्ज की जाएगी। बर्फबारी वाले इलाकों में मोबाइल एप की मदद ली जाएगी। लोग https://se.census.gov.in पर खुद अपनी जानकारी भर सकेंगे। लद्दाख के सात जिलों में करीब 2 लाख 74 हजार लोगों की जानकारी जुटाई जाएगी। जम्मू-कश्मीर के 16 जिलों में करीब 88 लाख 10 हजार लोगों की गिनती होगी। इनमें डोडा, पुंछ और कुपवाड़ा जैसे जिले भी शामिल हैं। पहाड़ों और खराब रास्तों के बीच होगी जनगणना इन इलाकों में जनगणना करना आसान नहीं है। कई गांव ऐसे हैं जहां सड़क नहीं है या पहुंचना बहुत मुश्किल है। लद्दाख के जंस्कार के कई गांवों में सड़क की सुविधा बहुत कम है। लेह का यिंगचेन गांव भी बहुत दूर है। यहां सिर्फ दो परिवारों के 11 लोग रहते हैं। पास के गांव तक पहुंचने में पैदल करीब 7 घंटे लगते हैं। इसी तरह चांगथांग का हानले गांव करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर है। अमित शर्मा ने बताया कि कुछ बहुत ऊंचाई वाले इलाकों में कम घर हैं। फिर भी वहां जनगणना कर्मचारी भेजे जाएंगे। सेना और आईटीबीपी के जवान जहां रहते हैं, वहां भी खास इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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