बाढ़ की शुरुआत कैसे हुई और सबसे ज्यादा असर कहां पड़ा? घर बचे तो भी लोगों के सामने कौन सी नई मुसीबत है? ग्रामीणों ने खुद कैसे संभाला मोर्चा? फसल और बच्चों की पढ़ाई पर कितना असर पड़ा? पुनर्वास के लिए कितनी बड़ी रकम की जरूरत होगी? अब असम के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है? 19 जुलाई को नगालैंड के मोन जिले की पहाड़ियों में हुई तेज बारिश के बाद नीचे बहने वाली दिखौ नदी में अचानक पानी बढ़ गया। इसके बाद बाढ़ का पानी कई गांवों में घुस गया। शिवसागर और चराइदेव के अलावा गोलाघाट समेत कई इलाकों में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अब भी करीब 49 हजार विस्थापित लोग राहत शिविरों और वितरण केंद्रों में रहने को मजबूर हैं।बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित इलाकों में घरों के अंदर कीचड़ और गाद जमा है। नतून बस्ती, हिलनी, सिंगेल बस्ती और गंगेडाढ़ा में लोगों के घरों में सामान तक कीचड़ में दब गया है। कहीं दीवारें गिर गई हैं तो कहीं कपड़े, बर्तन, अनाज और बच्चों की किताबें खराब हो गई हैं। कई मवेशी बह गए और गौशालाएं खाली हो गईं। अब लोगों के सामने घरों के साथ रोजगार और बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू करने की चुनौती है।बाढ़ के शुरुआती दौर में जब बचाव दल हर जगह नहीं पहुंच पाए थे, तब स्थानीय मल्लाहों ने बड़ी भूमिका निभाई। गांव के करीब 25 मल्लाहों ने नावों के जरिए तेज बहाव के बीच लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। उनके प्रयास से करीब 1,500 लोगों की जान बचाई गई। पानी कम होने के बाद अब राहत और पुनर्वास का काम चुनौती बना हुआ है। नेपालीखुटी जाने वाले रास्तों में जगह-जगह किताबों के ढेर और बाढ़ से बर्बाद सामान दिखाई दे रहे हैं।बाढ़ ने सिर्फ घरों को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Assam Flood: 103 लोगों की मौत, सात लाख से ज्यादा विस्थापित; 433 गांव जलमग्न, बाढ़ के बाद कैसे लौटेगी जिंदगी?
बाढ़ की शुरुआत कैसे हुई और सबसे ज्यादा असर कहां पड़ा? घर बचे तो भी लोगों के सामने कौन सी नई मुसीबत है? ग्रामीणों ने खुद कैसे संभाला मोर्चा? फसल और बच्चों की पढ़ाई पर कितना असर पड़ा? पुनर्वास के लिए कितनी बड़ी रकम की जरूरत होगी? अब असम के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है? 19 जुलाई को नगालैंड के मोन जिले की पहाड़ियों में हुई तेज बारिश के बाद नीचे बहने वाली दिखौ नदी में अचानक पानी बढ़ गया। इसके बाद बाढ़ का पानी कई गांवों में घुस गया। शिवसागर और चराइदेव के अलावा गोलाघाट समेत कई इलाकों में लोगों को मुश