बीएल संतोष ने आगे कहा कि आरएसएस विभाजन के समय भी पंजीकृत नहीं था। आज भी उसका औपचारिक पंजीकरण नहीं है। इसके बावजूद संगठन काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पंजीकरण से किसी संगठन का अस्तित्व तय नहीं होता। आरएसएस लाखों लोगों के भरोसे पर काम करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि विभाजन के समय आरएसएस हिंदुओं के साथ खड़ा था।संतोष ने यह भी कहा कि भारत को आजादी केवल नमक सत्याग्रह या चरखा चलाने से नहीं मिली। इसके पीछे हजारों क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान था। उन्होंने कहा कि लाखों देशभक्त युवाओं और सैनिकों ने अपनी जान दांव पर लगाई थी। मदन लाल ढींगरा, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 80वें स्वतंत्रता वर्ष में उनके बलिदान को याद करना जरूरी है। संतोष ने कहा, ‘आजादी हमें किसी ने तोहफे में नहीं दी थी। अंग्रेजों ने बस यूं ही हमें आजादी नहीं दी।‘बीएल संतोष ने दावा किया कि किसी क्षेत्र में हिंदू आबादी घटने से भारत से जुड़ाव की भावना कमजोर होती है। उन्होंने कहा कि जहां हिंदू आबादी घटती है, वहां ‘राष्ट्रविरोधी भावना’ पैदा होने लगती है। बंगलूरू की शिवाजीनगर और चामराजपेट सीटों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दो दशक से किसी भी राजनीतिक दल का हिंदू उम्मीदवार वहां नहीं जीता है।संतोष ने कहा, ‘हिंदुओं को बहुमत में इसलिए रहना चाहिए क्योंकि भारत को भारत ही रहना है।’ संतोष ने पाकिस्तान की मांग को जनसंख्या में बदलाव से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम लीग की राजनीतिक लामबंदी आखिरकार देश के विभाजन तक पहुंची।संतोष ने ‘अखंड भारत’ के लिए काम करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि अविभाजित …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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