1947 से अपने ही वतन में शरणार्थी हैं 97 वर्षीय पुष्पा देवी बताती हैं कि पाकिस्तानी फौज ने इस कदर कत्लेआम मचा रखा था कि वह अपने छह माह के दुधमुंह बेटे विनोद को छोड़कर चली आई थीं। दूसरे दिन मेरी सास उसे गोद में लिए पहुंची तो आंसू थमे। बताती हैं कि बाकी चार बच्चे यहीं पैदा हुए। जम्मू के बख्शीनगर/मीरपुर कॉलोनी मेंं रहने के दौरान मजदूरी कर सभी को पढ़ाया। बड़ा बेटा विनोद ओएनजीसी से उपनिदेशक पद से रिटायर हुए। अरुण कुमार जेएंडके बैंक से एजीएम, बेटी प्रवीन कुमारी इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य, सुमन बाला और सरोज बाला केंद्रीय विद्यालय से रिटायर हैं। 1947 से अपने ही वतन में शरणार्थी हैं जेएंडके बैंक के एजीएम पद से रिटायर अरुण कुमार कहते हैं कि मां आज भी मीरपुर जाने की जिद करती हैं। पुराने दौर को याद कर बिलखती रहती हैं। बख्शीनगर मेंं मिले आवास के बदले वर्ष 1970 में 4500 रुपये प्रदेश सरकार ने लिए थे, लेकिन मीरपुर में लूटे गए हमारे मकान-दुकान का कोई मुआवजा नहीं मिला। अपने ही आजाद वतन में हम 1947 से लेकर आज तक शरणार्थी ही हैं। जन्म से लेकर मृत्यु तक सरकार ने कभी कोई मदद नहीं की। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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