सुखबीर बादल ने कहा कि उन्हें दो बार सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में निशाना बनाने की कोशिश हुई। उन्होंने बताया कि पहली घटना अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुई थी और दूसरी बार नांदेड़ के तख्त हजूर साहिब स्थित माता साहिब देवन जी गुरुद्वारे में हमला हुआ। उन्होंने कहा, ‘दोनों बार उन्होंने मुझ पर सबसे पवित्र स्थानों पर हमला किया।‘बादल ने पंजाबी कहावत का जिक्र करते हुए कहा, ‘जिसके सिर पर गुरु साहिब का हाथ हो, उसे कोई आंच नहीं आती।’ उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज का धन्यवाद किया और कहा कि यह उनकी धरती है। उन्होंने कहा कि पंजाब की शांति के दुश्मनों ने बहुत कोशिश की, लेकिन गुरु ने उन्हें बचा लिया।बादल ने कहा कि वह डरे नहीं हैं और पंजाब के भाईचारे के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल किसी भी तरह का बलिदान देने को तैयार है, क्योंकि उनके लिए पंजाब का विकास ही देश का विकास है। उन्होंने कहा कि उनके पिता प्रकाश सिंह बादल ने मुख्यमंत्री रहते हुए सभी समुदायों और धर्मों के बीच सौहार्द और सम्मान बनाए रखा था।सुखबीर सिंह बादल ने यह भी कहा कि पिछले साल भी उन्हें निशाना बनाने की कोशिश हुई थी। उनका आरोप है कि ऐसी ताकतों का मकसद पंजाब की स्थिति पर नियंत्रण करना और राज्य की शांति भंग करना है।गुरुवार को नांदेड़ शहर के बाहरी इलाके में स्थित माता साहिब देवन जी मुगत गुरुद्वारे के अंदर निहंग समुदाय के एक सदस्य ने सुखबीर बादल पर कृपाण से हमला किया था। हमले में घायल होने के बाद बादल की स्थानीय अस्पताल में सर्जरी हुई। उन्हें शुक्रवार दोपहर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पुलिस ने कथित हमलावर जसपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलि …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
'पंजाब की शांति बिगाड़ना चाहते हैं कुछ ताकतें': हमले के बाद गरजे सुखबीर सिंह बादल, बोले- ऐसा नहीं होने दूंगा
सुखबीर बादल ने कहा कि उन्हें दो बार सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में निशाना बनाने की कोशिश हुई। उन्होंने बताया कि पहली घटना अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुई थी और दूसरी बार नांदेड़ के तख्त हजूर साहिब स्थित माता साहिब देवन जी गुरुद्वारे में हमला हुआ। उन्होंने कहा, 'दोनों बार उन्होंने मुझ पर सबसे पवित्र स्थानों पर हमला किया।'बादल ने पंजाबी कहावत का जिक्र करते हुए कहा, 'जिसके सिर पर गुरु साहिब का हाथ हो, उसे कोई आंच नहीं आती।' उन्होंने गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज का धन्यवाद किया और कहा कि यह उनकी धर