1 of 8 खत्ताघर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें यह खबर एप पर पढ़ें या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो देखें संक्षिप्त देखें लोड हो रहा है अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो लॉगिन करें Link Copied शहर से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे के निस्तारण के लिए वर्ष 2025 में शुरू हुआ चनौरा एमआरएफ प्लांट बारिश के कारण दलदल में तब्दील हो गया है। निजी संस्था इंवायरमेट टैक्नो प्राइवेट लिमिटेड के कर्मियों और निगम के कूड़ा गाड़ियों के चालकों/सफाई कर्मचारियों को दलदल व सड़ रहे कचरे के बीच नंगे हाथ-पैर काम करना पड़ रहा है। जबकि स्पष्ट नियम है कि यहां कर्मचारियों को लंबे सुरक्षा जूते (गमबूट), मंकी मास्क, एप्रन, ग्लव्स, सुरक्षा चश्मा, सैनिटाइजर, स्वच्छ पेयजल और फर्स्ट एड बॉक्स मिलना चाहिए, लेकिन ये सभी सुविधाएं कागजों तक ही सीमित हैं। शहर से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे के निस्तारण के लिए वर्ष 2025 में शुरू हुआ चनौरा एमआरएफ प्लांट बारिश के कारण दलदल में तब्दील हो गया है। निजी संस्था इंवायरमेट टैक्नो प्राइवेट लिमिटेड के कर्मियों और निगम के कूड़ा गाड़ियों के चालकों/सफाई कर्मचारियों को दलदल व सड़ रहे कचरे के बीच नंगे हाथ-पैर काम करना पड़ रहा है। जबकि स्पष्ट नियम है कि यहां कर्मचारियों को लंबे सुरक्षा जूते (गमबूट), मंकी मास्क, एप्रन, ग्लव्स, सुरक्षा चश्मा, सैनिटाइजर, स्वच्छ पेयजल और फर्स्ट एड बॉक्स मिलना चाहिए, लेकिन ये सभी सुविधाएं कागजों तक ही सीमित हैं। फिरोजाबाद के चनौरा स्थित 250 टीपीडी (टन प्रति दिन) क्षमता वाले एमआरएफ प्लांट (खत्ताघर) में कूड़े के ढेर के बीच काम करने वाले सफाई कर्मचार …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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