ट्रायल कोर्ट का फैसला रहेगा बरकरार याचिकाकर्ता ने ट्रायल कोर्ट के सितंबर 2020 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मामले की आगे की जांच के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद पुलिस ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की थी, जिसमें डॉक्टर को आईपीसी की धारा 313 (महिला की सहमति के बिना गर्भपात) और पॉक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत आरोपी बनाया गया था। हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष के रिकॉर्ड से डॉक्टर के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध बनता है और ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। इसलिए, डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक मुकदमा (ट्रायल) जारी रहेगा। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Delhi: 20 साल का बताकर कराया गर्भपात, बाद में निकली 16 साल की; डॉक्टर को HC से झटका, POCSO केस में ट्रायल जारी
ट्रायल कोर्ट का फैसला रहेगा बरकरार याचिकाकर्ता ने ट्रायल कोर्ट के सितंबर 2020 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मामले की आगे की जांच के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद पुलिस ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की थी, जिसमें डॉक्टर को आईपीसी की धारा 313 (महिला की सहमति के बिना गर्भपात) और पॉक्सो एक्ट की धारा 21 के तहत आरोपी बनाया गया था। हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष के रिकॉर्ड से डॉक्टर के खिलाफ प्रथम दृष्टया अपराध बनता है और ट्रायल कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं है। इसलि