31 साल पहले दिवंगत नवीन किशोर सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी को पटना पश्चिम का मजबूत किला बनाकर दिया था। उसके बाद से जीवन के अंतिम क्षण तक वह रिकॉर्ड बनाते हुए पटना पश्चिम के विधायक बने रहे। 2005 के अंत में जब उनके उप मुख्यमंत्री बनने की चर्चा थी, दिल्ली में उनका संदेहास्पद निधन हो गया। इसके बाद 2006 में उप चुनाव हुआ और नितिन नवीन का राजनीति में पदार्पण। नितिन तब पटना पश्चिम के विधायक बने और जब बांकीपुर के रूप में इसका नामकरण हुआ तो भी लगातार वह कुर्सी पर कायम रहे। 2025 के विधानसभा चुनाव में भी वह जीते। तब तक इसे कायस्थों का दुर्ग कहा जाता था। अब नहीं कहा जाएगा, क्योंकि अब यह सीट इस जाति के पास नहीं रही। पश्चिम बंगाल के कायस्थों को संदेश देने के लिए नितिन नवीन को भाजपा अध्यक्ष बनाने वाली भाजपा अब क्या करेगी, यह सवाल बांकीपुर उप चुनाव से पहले ही कौंधने लगा था। परिणाम के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है। पटना से कायस्थ प्रतिनिधियों का सफाया पटना में शहरी दोनों सीटें कायस्थों के पास थी। एक साल के अंदर दोनों ही सीटों से भाजपा ने कायस्थों को मुक्त कर दिया है। एक कुम्हार सीट थी, जिसे कायस्थों से छीनकर भाजपा ने वैश्य समाज को दे दिया। यहां से भाजपा को जिताने वाले कायस्थ वोटरों को अब जोर का झटका लगा होगा, क्योंकि उनके बगल की बांकीपुर सीट भाजपा ने कायस्थ के नाम पर दी तो लेकिन सारे मजबूत प्रत्याशी को छोड़ एक अनजान चेहरे को उतार दिया। बांकीपुर सीट पर पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा के बेटे ऋतुराज सिन्हा, धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष प्रो. रणवीर नंदन, पद्मश्री डॉ. गोपाल प्रसाद सिन्हा के बेटे अजय आलोक जैसे नाम थे; लेकिन भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के भरोसेमंद के नाम पर पहले अभिषेक ब …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Election Results : नितिन नवीन अपना उत्तराधिकारी भी नहीं दे सके; सालभर में कायस्थ प्रतिनिधि-मुक्त हुआ पटना
31 साल पहले दिवंगत नवीन किशोर सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी को पटना पश्चिम का मजबूत किला बनाकर दिया था। उसके बाद से जीवन के अंतिम क्षण तक वह रिकॉर्ड बनाते हुए पटना पश्चिम के विधायक बने रहे। 2005 के अंत में जब उनके उप मुख्यमंत्री बनने की चर्चा थी, दिल्ली में उनका संदेहास्पद निधन हो गया। इसके बाद 2006 में उप चुनाव हुआ और नितिन नवीन का राजनीति में पदार्पण। नितिन तब पटना पश्चिम के विधायक बने और जब बांकीपुर के रूप में इसका नामकरण हुआ तो भी लगातार वह कुर्सी पर कायम रहे। 2025 के विधानसभा चुनाव में भी वह