अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि हाईकोर्ट में दाखिल आवेदन केवल अंतरिम संरक्षण आदेश में संशोधन की मांग से जुड़ा है, ताकि उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मिल सके। उन्होंने कहा, “यह एक साधारण आवेदन है, जिसमें केवल चिकित्सा उपचार के लिए विदेश यात्रा की अनुमति देने के उद्देश्य से हाईकोर्ट के संरक्षण आदेश में संशोधन का अनुरोध किया गया है। माननीय न्यायालय इससे कहीं अधिक गंभीर मामलों में भी मुझे यह राहत दे चुका है।“प्रतिवादियों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह आवेदन पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट की समेकित मासिक सूची में शामिल किया जा चुका है। उन्होंने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट से इसे किसी निश्चित तारीख पर सुनवाई के लिए लेने का अनुरोध किया जा सकता है।इस पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और हाईकोर्ट से लंबित आवेदन पर शीघ्र निर्णय लेने का अनुरोध किया। पीठ ने कहा, “चिकित्सा उपचार के लिए विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी आवेदन हाईकोर्ट में लंबित है। ऐसा प्रतीत होता है कि अब तक इसकी कोई तारीख तय नहीं हुई है। इसलिए हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि वह इस आवेदन पर विचार करे।“अभिषेक बनर्जी के विदेश यात्रा पर लगी रोक एक पुराने आदेश के कारण है, जो लंबित आपराधिक मामले में पारित किया गया था। उस आदेश में कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देते हुए यह शर्त लगाई थी कि वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश से बाहर नहीं जाएंगे।यह शर्त हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए कथित भड़काऊ भाषण से जुड़े आपराधिक मामले में गिर …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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