होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी बाधाओं के बीच इराक ने अपने तेल निर्यात को सुरक्षित और स्थिर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इराक और तुर्किये ने शनिवार को एक साल के लिए तेल पाइपलाइन समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत इराक तुर्किये के भूमध्यसागरीय बंदरगाह जेहान तक पाइपलाइन के जरिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का निर्यात करेगा। इराक का मानना है कि इससे खाड़ी के समुद्री मार्गों पर उसकी निर्भरता कम होगी और तेल निर्यात में आने वाली बाधाओं से राहत मिलेगी। समझौते में क्या तय हुआ? इराक के तेल मंत्री बासेम मोहम्मद खुदैर अल-अबादी ने बताया कि यह समझौता एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान दोनों देश तेल, बिजली और जल संसाधन क्षेत्रों में व्यापक सहयोग के लिए दीर्घकालिक ढांचा समझौता तैयार करेंगे। नए समझौते के तहत किर्कुक से तुर्किये के जेहान बंदरगाह तक जाने वाली पाइपलाइन के जरिए प्रतिदिन कम से कम 7.5 लाख बैरल इराकी कच्चे तेल का निर्यात किया जाएगा। यह कदम इराक के तेल निर्यात के लिए एक वैकल्पिक और सुरक्षित मार्ग तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। होर्मुज संकट के बीच इस समझौते की जरूरत क्यों पड़ी? यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे इराक के तेल निर्यात पर भी असर पड़ा, क्योंकि युद्ध से पहले इराक प्रतिदिन लगभग 35 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात करता था और उसका अधिकांश हिस्सा दक्षिणी टर्मिनलों से होकर होर्मुज मार्ग के जरिए भेजा जाता था। नई पाइपलाइन के जरिए होने वाला निर्यात युद्ध से पहले के स्तर तक तो नहीं पहुंचेगा, लेकिन मौजूदा लगभग 2 लाख बैरल प्रतिदिन के निर्यात की तुल …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें