भागवत ने शुक्रवार को ‘युगानुकूल मातृत्व’ कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बच्चे अक्सर हिंदू देवी-देवताओं को लेकर सवाल पूछते हैं। लेकिन कई बार माता-पिता उनके सवालों का जवाब नहीं दे पाते। उन्होंने कहा,बच्चे अक्सर वापस आकर ऐसे सवाल पूछते हैं, जिनके जवाब जरूरी होते हैं। जैसे यह भगवान बंदर के चेहरे वाले क्यों हैं? यह भगवान हाथी के चेहरे वाले क्यों हैं? लेकिन अक्सर पिता को इन सवालों के जवाब नहीं पता होते और मां को भी नहीं। उन्होंने कहा, ये बातें शुरुआत से ही पाठ्य पुस्तकों में होनी चाहिए। ये जानकारी आसानी से उपलब्ध होनी चाहिए। हम बच्चों को जो भी सिखाते हैं, वही ज्ञान वे हासिल करते हैं। पहले 12 साल तक उनका पालन-पोषण हमारे हाथ में होता है। हमें उन्हें जानकारी देनी चाहिए और इसके लिए हमें खुद भी सीखना चाहिए। बच्चों की परवरिश को लेकर क्या कहा? आरएसएस प्रमुख ने कहा कि आज की पीढ़ी के बच्चों की परवरिश के लिए अलग तरीके की जरूरत है। इसमें आदेश देने के बजाय बातचीत पर ज्यादा जोर होना चाहिए। उन्होंने कहा, जब हम बच्चे थे, तब मां कुछ कह देती थीं या पिता कह देते थे कि कोई बहस नहीं होगी, तो हम उसे मान लेते थे। हम सवाल नहीं करते थे, क्योंकि हमें पता था कि उन्होंने जीवन देखा है और वे चीजों को हमसे बेहतर समझते हैं। भागवत ने कहा, आज ऐसा नहीं है। आप बच्चों के साथ सख्त रवैया नहीं अपना सकते। आपको उन्हें चीजें समझानी होंगी। वे ऐसे माहौल में बड़े हो रहे हैं, जहां हर तरफ भौतिक चीजों का प्रभाव और लगातार प्रचार मौजूद है। हमें उन्हें इस उलझन से बाहर निकलने का रास्ता दिखाना होगा। उन्होंने कहा, उन्हें बहुत स्नेह की जरूरत है। उन्हें हमारा समय चाहिए। उन्हे …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें