दिल्ली पुलिस ने इस बात को खारिज किया है कि पेपर लीक के खिलाफ राजधानी में चल रहे प्रदर्शनों में शामिल लोगों को हिरासत में लेने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत उसे नई शक्तियां दी गई हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह आदेश एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया नवीनीकरण है, जो कई वर्षों से लागू है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब कथित परीक्षा अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में प्रदर्शन जारी है। कुछ दिन पहले ही हजारों लोगों ने इस मुद्दे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस मार्च के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। गृह विभाग की अधिसूचना में क्या कहा गया? दिल्ली सरकार के गृह विभाग की ओर से 15 जुलाई को जारी अधिसूचना के अनुसार, शहर के पुलिस आयुक्त को एनएसए की धारा 3 की उपधारा (2) के तहत हिरासत में लेने की शक्ति दी गई है। यह शक्ति 18 अक्तूबर तक प्रभावी रहेगी। एनएसए क्या है? एनएसए केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसे लोगों को हिरासत में रखने का अधिकार देता है, ताकि वे भारत की सुरक्षा के लिए नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां न कर सकें। एनएसए के तहत हिरासत की अवधि तीन से 12 महीने तक हो सकती है, हालांकि इसे इससे पहले भी खत्म किया जा सकता है। यह एहतियाती हिरासत होती है, गिरफ्तारी नहीं, इसलिए हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अदालत के सामने पेश करना कानूनी रूप से जरूरी नहीं होता। ये भी पढ़ें: दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि एनएसए के तहत हिरासत में लेने की शक्ति को हर तीन महीने म …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

मूल लेख स्रोत पर पढ़ें