सूत्रों के अनुसार, अगर भविष्य में इससे जुड़े प्रावधानों को फिर से लागू किया जाता है, तो इसके लिए संधि पर नए स्वरूप में बातचीत करनी होगी। यह तभी संभव होगा, जब पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को स्थायी रूप से समर्थन देना बंद करे।सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान यह गलत धारणा बनाने की कोशिश कर रहा है कि भारत द्वारा संधि को स्थगित किए जाने से वहां पानी की कमी हो रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान को मिलने वाले पानी का बड़ा हिस्सा पर्याप्त भंडारण व्यवस्था के अभाव, भारी रिसाव और प्रांतों के बीच जल बंटवारे के विवादों के कारण नष्ट हो जाता है।उन्होंने कहा कि भारत फिलहाल सिंधु जल संधि से अलग होने की दिशा में सक्रिय रूप से विचार नहीं कर रहा है, लेकिन एक संप्रभु देश होने के नाते उसके पास अपने हितों के खिलाफ जाने वाली किसी भी संधि को समाप्त करने का अधिकार सुरक्षित है। एक सूत्र ने कहा, “यह (संधि से बाहर निकलना) इस बात पर निर्भर करेगा कि आगे पाकिस्तान क्या कदम उठाता है।“पिछले वर्ष अप्रैल में पहलगाम आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद भारत ने कई कूटनीतिक और आर्थिक कदम उठाए थे। इन्हीं के तहत सिंधु जल संधि को भी स्थगित करने का फैसला लिया गया था। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इस हमले को पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (टीआरएफ) ने अंजाम दिया था। इसके जवाब में भारत ने मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को निशाना बनाया था।एक अन्य सूत्र ने कहा, “यह कहना सही होगा कि सिंधु जल संधि अपने मौजूदा स्वरूप में दोबारा लागू नहीं होगी। अगर इससे जुड़े प्रावधानों को फिर से लागू करना है, तो वह मौजूदा स्वरूप में नहीं बल्क …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
'PAK रोके आतंकवाद, तभी आगे बढ़ेगी बात': सिंधु जल संधि को मिलेगा नया रूप, भारत ने कर ली ये बड़ी तैयारी
सूत्रों के अनुसार, अगर भविष्य में इससे जुड़े प्रावधानों को फिर से लागू किया जाता है, तो इसके लिए संधि पर नए स्वरूप में बातचीत करनी होगी। यह तभी संभव होगा, जब पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद को स्थायी रूप से समर्थन देना बंद करे।सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान यह गलत धारणा बनाने की कोशिश कर रहा है कि भारत द्वारा संधि को स्थगित किए जाने से वहां पानी की कमी हो रही है। जबकि वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान को मिलने वाले पानी का बड़ा हिस्सा पर्याप्त भंडारण व्यवस्था के अभाव, भारी रिसाव और प्रांतों के बीच जल ब