इस मुद्दे से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने रेत के जमाव और निकासी की निगरानी के लिए उपग्रह चित्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे आधुनिक तकनीकी साधनों के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया।17 जुलाई के आदेश, जिसे मंगलवार को सार्वजनिक किया गया, में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में अधिकरण को उन सरकारी अधिसूचनाओं और नियमों की जांच करने का निर्देश दिया था, जिनके तहत कृषि भूमि से रेत हटाने की अनुमति दी जाती है। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत ने इन प्रावधानों के दुरुपयोग से होने वाले ऊपरी उपजाऊ मिट्टी के कटाव और अवैध खनन से पर्यावरण को होने वाले नुकसान पर चिंता जताई थी।एनजीटी ने कहा कि प्रभावी निगरानी के लिए उसने पहले भी कुछ निर्देश जारी किए थे। इसके बाद केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने मई 2026 में शपथपत्र दाखिल कर बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से परामर्श के बाद एक रूपरेखा तैयार की गई है।पीठ ने कहा कि मंत्रालय के शपथपत्र के अनुसार, वर्ष 2026 में विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) ने माना था कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के भौगोलिक और स्थलाकृतिक अंतर को देखते हुए एक समान व्यवस्था लागू करना संभव नहीं है।ईएसी ने प्राकृतिक भूमि की संरचना को सुरक्षित रखने, प्राकृतिक सतह से नीचे खुदाई या खनन पर रोक लगाने, रेत के जमाव का आकलन करने, अवैध खनन रोकने के उपाय करने, वैज्ञानिक मूल्यांकन और निगरानी प्रणाली विकसित करने, वास्तविक समय में निगरानी लागू करने तथा रेत हटाने के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने जैसी कई सिफारिशें की हैं। …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
NGT: अवैध रेत खनन पर एनजीटी का सख्त रुख, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नियामक ढांचा बनाने का निर्देश
इस मुद्दे से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने रेत के जमाव और निकासी की निगरानी के लिए उपग्रह चित्रों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे आधुनिक तकनीकी साधनों के इस्तेमाल का भी सुझाव दिया।17 जुलाई के आदेश, जिसे मंगलवार को सार्वजनिक किया गया, में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2024 में अधिकरण को उन सरकारी अधिसूचनाओं और नियमों की जांच करने का निर्देश दिया था, जिनके तहत कृषि भूमि से रेत हटाने की अनुमति दी ज