अराघची ने बातचीत के दौरान का एक वाकया याद करते हुए कहा कि उन्होंने विटकॉफ से ऐसी बात कही थी, जिससे वहां मौजूद सभी लोग कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गए। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह बातचीत किस दौर या किस स्थान की थी। उन्होंने कहा, “मैंने विटकॉफ से पूछा, ‘क्या आप कभी ऐसी बैठक में रहे हैं, जहां आपको लगा हो कि किसी भी पल वहां धमाका हो सकता है?’ मेरी बात सुनकर वहां मौजूद सभी लोग स्तब्ध होकर मुझे देखने लगे।“अराघची ने कहा कि उन्होंने विटकॉफ से यह भी पूछा, “क्या आपने कभी फोन पर बात करते समय यह महसूस किया है कि किसी भी पल आप बमबारी में मारे जा सकते हैं, गायब हो सकते हैं और अपने परिवार से बात करते हुए यह सोचा हो कि शायद यह हमारी आखिरी बातचीत हो?“उन्होंने कहा कि अमेरिका उन्हें न तो धमका सकता है और न ही किसी दबाव में ला सकता है, क्योंकि ईरान पहले भी ऐसे हालात का सामना कर चुका है और मजबूती से खड़ा रहा है। अराघची ने कहा, “यह वेनेजुएला जैसी जगह नहीं है, जहां किसी एक व्यक्ति को हटाने पर बाकी लोग डर जाएं और पीछे हट जाएं।“अराघची ने कहा कि 12 दिन तक चले युद्ध से पहले बातचीत के दौरान ईरान ने अमेरिका की मांगों के आगे झुकने से इनकार कर दिया था। इसके बाद अमेरिका ने कठिन रास्ता चुना। उन्होंने कहा, “अमेरिका ने कठिन रास्ता चुना और 12 दिन के युद्ध में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। मेरी राय में, 12 दिन के युद्ध के बाद उन्होंने एक और गलत आकलन किया।“उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के प्रतिरोध का सही आकलन नहीं किया था। बाद में उसने अपने हथियारों और सैन्य संसाधनों को बढ़ाया, लेकिन आखिरकार उसे युद्ध समाप्त करना पड़ा। अराघची ने कहा, “यहूदी शासन को लगा था कि कुछ दिनों क …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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