एक साक्षात्कार में नोरीन नियाजी ने दावा किया था कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ संघर्ष पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिलीभगत का नतीजा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य पाकिस्तानी सेना की छवि को बेहतर बनाना था।इस साक्षात्कार के सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित होने के बाद नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने समन जारी किया। एजेंसी ने शनिवार को समन जारी करते हुए नोरीन नियाजी को सोमवार को इस्लामाबाद स्थित अपने कार्यालय में पेश होने को कहा है।समन में कहा गया, “आपके द्वारा सोशल मीडिया पर राज्य संस्थानों को बदनाम करने और झूठे नैरेटिव फैलाने के लिए झूठी, आपत्तिजनक और भड़काऊ सामग्री प्रसारित किए जाने के प्रमाण मिले हैं।” साक्षात्कार में नोरीन नियाजी ने पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद चार दिनों तक चले संघर्ष में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई को भी कमतर बताने की कोशिश की।समन में कहा गया है कि नोरीन ने बिना कोई साक्ष्य दिए दावा किया कि भारत ने संघर्ष को आगे इसलिए नहीं बढ़ाया, क्योंकि पाकिस्तान इस्राइल को मान्यता देने की दिशा में बढ़ रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का उद्देश्य पाकिस्तान के लिए अब्राहम समझौते में शामिल होने का रास्ता तैयार करना था।पाकिस्तान उन देशों में शामिल है, जो इस्राइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता और उसके साथ उसके राजनयिक संबंध भी नहीं हैं। वहीं, अमेरिका की मध्यस्थता में हुए अब्राहम समझौते के तहत इस्राइल, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सूडान, मोरक्को समेत कई अरब देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित हुए।नोरीन नियाजी …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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