अमेरिका और इराक के बीच करीब 60 अरब डॉलर के समझौते। नई पाइपलाइन के जरिए तेल आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों पर काम। होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने की कोशिश। शेवरॉन समेत कई अमेरिकी कंपनियों का बड़ा निवेश। वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और तेल बाजार पर पड़ सकता है बड़ा असर। अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स में हुए इस समझौते में ऊर्जा के अलावा स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े निवेश भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो वैश्विक तेल बाजार को एक नया और सुरक्षित विकल्प मिल सकता है।दुनिया के समुद्री तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में जब भी इस इलाके में तनाव बढ़ता है, पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद होर्मुज मार्ग प्रभावित है। इसी वजह से अब अमेरिका और उसके सहयोगी देश ऐसे वैकल्पिक रास्ते तैयार करना चाहते हैं, जिनसे तेल की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रह सके।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि नई पाइपलाइन बनाना आसान नहीं होगा। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, एक देश के भीतर पाइपलाइन बनाने में ही करीब ढाई साल लग सकते हैं। कई देशों से होकर गुजरने वाली पाइपलाइन परियोजनाओं को पूरा होने में इससे भी अधिक समय लग सकता है।पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की कीमत करीब 88 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले यह लगभग 67 डॉलर प्रति बैरल थी। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में तनाव बना रहेगा, तब तक …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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