भारत और बांग्लादेश के बीच कहां अटकी बात? द डिप्लोमैट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के जल बंटवारे को लेकर बातचीत कई वर्षों से चल रही थी। 1983 में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यवस्था बनाई थी, लेकिन इसे कभी औपचारिक समझौते का रूप नहीं दिया गया। इसके बाद सितंबर 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा से ठीक पहले दोनों देशों के बीच एक मसौदा समझौता तैयार हुआ। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसमें प्रस्ताव था कि 20% पानी पर्यावरणीय प्रवाह के लिए छोड़ा जाएगा, जबकि भारत को 42.5% और बांग्लादेश को 37.5% पानी मिलेगा। भविष्य में जल प्रवाह का सही आकलन करने के लिए एक संयुक्त हाइड्रोलॉजिकल ऑब्जर्वेशन स्टेशन स्थापित करने का भी प्रस्ताव था। हालांकि, यह समझौता अंतिम रूप नहीं ले सका। उस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि प्रस्तावित जल बंटवारे से उत्तर बंगाल के कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग जैसे जिलों की सिंचाई और पेयजल की जरूरतें पूरी नहीं हो पाएंगी। इसी कारण उन्होंने मनमोहन सिंह के साथ ढाका जाने से भी इनकार कर दिया। भारत की संघीय व्यवस्था में अंतरराज्यीय नदी के जल बंटवारे से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर संबंधित राज्य की सहमति महत्वपूर्ण मानी जाती है। पश्चिम बंगाल की आपत्तियों के चलते 2011 का मसौदा समझौता हस्ताक्षर तक नहीं पहुंच सका। भारत ने क्या पेशकश की थी? भारत ने एक बार फिर सहमति जताने की कोशिश करते हुए 2024 में इस परियोजना के लिए लगभग एक अरब डॉलर की वित्तीय सहायता देने का प्रस्ताव रखा था। इसका उद्देश्य था कि परियोजना भारत के सहयोग से पूरी हो। लेकिन इसी दौरान बांग्लादेश में राजनीत …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
Explainer: तीस्ता परियोजना पर बांग्लादेश ने क्यों थामा चीन का हाथ, भारत की चिंता की वजह क्या है?
भारत और बांग्लादेश के बीच कहां अटकी बात? द डिप्लोमैट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के जल बंटवारे को लेकर बातचीत कई वर्षों से चल रही थी। 1983 में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यवस्था बनाई थी, लेकिन इसे कभी औपचारिक समझौते का रूप नहीं दिया गया। इसके बाद सितंबर 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा से ठीक पहले दोनों देशों के बीच एक मसौदा समझौता तैयार हुआ। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इसमें प्रस्ताव था कि 20% पानी पर्यावरणीय प्रवाह के लिए छोड़ा जाएगा