जयपुर के बहुचर्चित नीरज शर्मा हत्याकांड में बेटी आयुषी शर्मा समेत सात आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं। पुलिस ने सड़क हादसे की गुत्थी को सुनियोजित हत्या में बदलने वाली साजिश का खुलासा भी कर दिया है लेकिन इस हाई-प्रोफाइल केस की सबसे अहम कड़ी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। घटना के बाद से फरार चल रहा बलराम शर्मा उर्फ रवि जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। पुलिस का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद ही इस हत्याकांड के कई ऐसे राज सामने आएंगे, जिन पर अभी पर्दा पड़ा हुआ है। करीब दो सप्ताह पहले हुई नीरजा शर्मा की मौत को शुरुआत में सड़क हादसा माना गया था लेकिन सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर की सूचना और तकनीकी जांच ने पुलिस को उस कथित साजिश तक पहुंचा दिया, जिसमें बेटी आयुषी शर्मा, उसके ताऊ मोहन शर्मा, सुपारी लेकर वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके बावजूद पुलिस का दावा है कि पूरे घटनाक्रम की सबसे अहम कड़ी बलराम शर्मा अब भी गिरफ्त से बाहर है।पुलिस की जांच में बलराम सिर्फ फरार आरोपी नहीं, बल्कि पूरे घटनाक्रम की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है। जांच के दौरान सामने आया कि पिता विजय शर्मा की मौत के बाद आयुषी और उसका चचेरा भाई बलराम लगातार साथ रहे। दोनों ने साथ में एलएलबी में दाखिला लिया और लंबे समय तक एक ही घर में रहे। मृतका के भाई राकेश शर्मा ने आरोप लगाया है कि दोनों के बीच करीबी संबंध थे और बलराम किसी वीडियो के जरिए आयुषी को ब्लैकमेल भी करता था। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान करोड़ों रुपये की संपत्ति, अनुकंपा …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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