आजादी के बाद चर्चित भूख हड़तालें कौन सी रहीं? पोट्टी श्रीरामलू: भारत के इतिहास की सबसे चर्चित भूख हड़तालों में पोट्टी श्रीरामलू का नाम लिया जाता है। उन्होंने 19 अक्तूबर 1952 को तेलुगु भाषी लोगों के लिए अलग आंध्र राज्य की मांग को लेकर आमरण अनशन शुरू किया। 56 दिन बाद 15 दिसंबर 1952 को उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद बड़े पैमाने पर आंदोलन हुआ और केंद्र सरकार ने अलग आंध्र राज्य के गठन की घोषणा की। मास्टर तारा सिंह (1961) शिरोमणि अकाली दल के नेता मास्टर तारा सिंह ने पंजाबी भाषी राज्य की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने 48 दिन बाद अनशन समाप्त किया। उनके ‘पंजाबी सूबा आंदोलन’ के परिणामस्वरूप 1 नवंबर 1966 को पंजाब का पुनर्गठन हुआ। संत फतेह सिंह (1966) संत फतेह सिंह ने नवगठित पंजाब में चंडीगढ़ को शामिल करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल की। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने 10 दिन में अनशन समाप्त किया। हालांकि चंडीगढ़ आज भी पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी है। के. चंद्रशेखर राव (2009) तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर 29 नवंबर 2009 को आमरण अनशन शुरू किया। सरकार ने उन्हें गिरफ्तार किया, लेकिन उन्होंने जेल में भी अनशन जारी रखा। तबीयत बिगड़ने और बढ़ते जनदबाव के बाद केंद्र सरकार ने तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की। इसके बाद उन्होंने 11 दिन में अनशन समाप्त कर दिया। इरोम शर्मिला (2000-2016) मणिपुर की इरोम चानू शर्मिला को आयरन लेडी ऑफ मणिपुर कहा जाता है। उन्होंने नवंबर 2000 में सशस्त्र बल (विशेष अधिकार …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)

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