विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय गहरे विरोधाभास का सामना कर रही है। हम हिंसा और अस्थिरता के ऐसे स्तर देख रहे हैं जो दूर बैठे लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है कि सदस्य देश वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय शांति में उसके योगदान के रिकॉर्ड का आकलन करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुरक्षा परिषद में भारत की मौजूदगी से व्यापक विचार-विमर्श और हितों के तालमेल के माध्यम से इस महत्वपूर्ण संस्था के निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी।वैश्विक शासन के प्रति भारत के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए जयशंकर ने ‘शांति’ (SHANTI) दृष्टिकोण को सामने रखा। इसका पूरा नाम ‘सिक्योरिंग होलिस्टिक एडवांसमेंट थ्रू नॉर्म्स, ट्रस्ट एंड इंटीग्रिटी’ (नियमों, विश्वास और ईमानदारी के माध्यम से समग्र प्रगति को सुरक्षित करना) है। उन्होंने इसे एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और न्यायसंगत दुनिया के लिए भारत के प्रयासों का मार्गदर्शक सिद्धांत बताया। उन्होंने कहा कि हाल के घटनाक्रमों ने दिखाया है कि शांति, प्रगति और समृद्धि को टुकड़ों में बनाए नहीं रखा जा सकता। दुनिया को समग्र प्रगति पर ध्यान देना चाहिए। यह यात्रा तभी प्रभावी हो सकती है जब वैश्विक व्यवस्था का सम्मान हो और नियमों का पालन किया जाए।संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भारत के योगदान पर प्रकाश डालते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के बाद से भारत ने लगभग 50 शांति मिशनों में करीब 3,00,000 सैनिकों को तैनात किया है। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के 11 सक्रिय मिशनों में से 10 में भारत के 4,300 सैनिक तैनात हैं। भारत बेहतर उपकरणों, तकनीक स …(पूरी खबर स्रोत पर पढ़ें)
UNSC: भारत ने यूएनएससी की अस्थायी सदस्यता के लिए शुरू किया अभियान, सीट के दावे पर क्या बोले एस जयशंकर?
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया इस समय गहरे विरोधाभास का सामना कर रही है। हम हिंसा और अस्थिरता के ऐसे स्तर देख रहे हैं जो दूर बैठे लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह स्वाभाविक है कि सदस्य देश वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय शांति में उसके योगदान के रिकॉर्ड का आकलन करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुरक्षा परिषद में भारत की मौजूदगी से व्यापक विचार-विमर्श और हितों के तालमेल के माध्यम से इस महत्वपूर्ण संस्था के निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबू